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सत्यम कम्प्यूटर के भविष्य का सवाल
संदीप तिवारी
विवादों में घिरी सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी सत्यम कम्प्यूटर सर्विसेस को ऐसी संपत्ति बन गई है जिसके इर्दगिर्द कई संभावित खरीदार ँडरा रहे हैं। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और प्राइवेट इक्विटी फर्म्‍स सत्यम को खरीदने की इच्छुक हैं तो इस बात की अटकलें भी हैं कि कुछ भारतीय आईटी कंपनियाँ घरेलू फर्मों से हाथ मिलाकर सत्यम से विलय करने या इसे खरीदने में दिलचस्पी ले रही हैं।

बहरहाल कोई भी सौदा होने में काफी समय लगेगा क्योंकि उसके लिए कई मुद्दों को सुलझाना पड़ेगा परंतु संभावित विलय या अधिग्रहण को लेकर विभिन्न कंपनियों की रणनीति बनाने की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। निवेश बैंकिंग जगत के सूत्रों का कहना है कि एचसीएल टेक्नोलॉजीज और कॉग्निजैंट जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के साथ सत्यम के विलय की संभावना अधिक व्यावहारिक लग रही है, क्योंकि इस खरीद या विलय से बड़ी आईटी कंपनियों को खुद को कहीं ज्यादा विशाल संगठन में बदलने का मौका मिलेगा।

यदि एचसीएल-सत्यम का विलय होता है तो यह भारत में आईटी सेवा कंपनियों का आकार के लिहाज से बनने वाला क्रम बदल देगा। इस होड़ में टेक महिन्द्रा का नाम भी उभर रहा है। दूरसंचार क्षेत्र पर केन्द्रित और बहुत हद तक ब्रिटिश टेलीकॉम पर निर्भर यह कंपनी सत्यम के साथ विलय के जरिये अपना जोरदार विस्तार कर सकती है।

हालाँकि टेक महिन्द्रा दूरसंचार क्षेत्र पर केन्द्रित है और देर-सवेर इसे अन्य क्षेत्रों में पाँव रखने की जरूरत पड़ेगी, इस कारण से सत्यम के साथ कोई भी सौदा इसके लिए रणनीतिक महत्व का होगा। विदेश में मौजूदगी बढ़ाने के लिहाज से कुछ अन्य कंपनियों की भी सत्यम पर नजर हो सकती है।

आउटसोर्सिंग के परिदृश्य पर विचार करने से सत्यम-कॉग्निजैंट का गठजोड़ भी संभव है, क्योंकि उनकी क्षमताएँ एक-दूसरे की पूरक हैं। कॉग्निजैंट एप्लिकेशंस में मजबूत है तो सत्यम को ईआरपी में महारत हासिल है। इसके अलावा संभावना यह भी है कि हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज में 15 फीसदी और पटनी में करीब 18 फीसदी हिस्सा रखने वाली जनरल अटलांटिक पार्टनर्स (जीएपी) सत्यम को खरीदने पर विचार कर सकती है।

इस बीच महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) ग्रुप की कंपनी टेक महिंद्रा ने कैशलेस विलय के लिए सत्यम कम्प्यूटर सर्विसेज से संपर्क साधा है। अगर यह सौदा आगे बढ़ता है तो टेक महिंद्रा का देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनी सत्यम में विलय हो जाएगा और यह देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी होगी। विलय होने के बाद बनने वाली इकाई का प्रबंधन एमएंडएम के हाथों में रहने की संभावना है।

सत्यम में टेक महिंद्रा की दिलचस्पी के बारे में एक जानकार सूत्र का कहना है कि दोनों कंपनियों का कारोबार एक-दूसरे के पूरक है। उन्होंने कहा कि अगर सौदा कामयाबी तक पहुँचा तो इसका श्रेय दोनों कंपनियों के कारोबार के आपस में न टकराने को दिया जाएगा।

सत्यम में टेक महिंद्रा का विलय सौदे के पक्ष में काम करेगा क्योंकि यह किसी बड़ी कंपनी का छोटी कंपनी को निगलने जैसा मामला नहीं है। एक फंड मैनेजर के अनुसार इस उद्देश्य के लिए एमएंडएम ने मेरिल लिंच से संपर्क साधा है। दोनों कंपनियों का विलय होने के लिए सत्यम में 4.5 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले राजू के अलावा कुछ बड़े संस्थागत निवेशकों को भी टेक महिंद्रा के प्रस्ताव पर राजी होना पड़ सकता है।

सत्यम कम्प्यूटर के बही-खातों में जबरदस्त धोखाधड़ी के खुलासे के बाद शेयरों के दामों में आई कमी का फायदा उठाते हुए लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने भी बुधवार को स्टॉक मार्केट से कंपनी के शेयर खरीदने का अभियान तेज कर दिया। माना जा रहा है कि इंजीनियरिंग क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी ने सत्यम में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 3.5-4 फीसदी कर ली जो पिछले सप्ताह 2 फीसदी थी।

हालाँकि एलएंडटी के अधिकारियों ने इस सिलसिले में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया लेकिन घटनाक्रम से वाकिफ लोगों ने कहा कि हिस्सेदारी खरीदने की 'रणनीतिक वजह' की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि कंपनी अपनी सहयोगी एलएंडटी इन्फोटेक के जरिये सॉफ्टवेयर सेक्टर में पहले से दिलचस्पी रखती है।

घटना की जानकारी रखने वाले एक व्य‍‍क्त‍ि का दावा है कि फिलहाल यह केवल पोर्टफोलियो निवेश है लेकिन एलएंडटी की रणनीतिक हिस्सेदारी पर गौर करने की संभावना को दरकिनार नहीं किया जा सकता, क्योंकि देर-सवेर इस विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
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