दुनिया में छाए आर्थिक संकट का असर देश के पर्यटन क्षेत्र पर भी पड़ने की आशंका है। चालू वित्त वर्ष में पर्यटन क्षेत्र की वृद्धि दर 10 प्रतिशत तक घटकर पाँच प्रतिशत के आसपास रह जाने का अनुमान है।
एसोचैम की पर्यटन समिति के अनुमान के मुताबिक अब तक यह माना जा रहा था कि इस साल पर्यटन क्षेत्र में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर होगी, लेकिन अब जबकि अमेरिका, जापान और यूरोप के कई देशों में आर्थिक संकट की स्थिति खड़ी हो गई है यह माना जा रहा है कि इसमें इतनी वृद्धि नहीं होगी।
एसोचैम के मुताबिक अमेरिका से भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या पर पहले ही प्रतिकूल असर पड़ना शुरू हो गया है और इस साल के अंत तक यह असर 10 से 15 प्रतिशत तक हो सकता है। इसके अलावा यूरोप से आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
हालाँकि उद्योग मंडल की समिति यह भी मानती है कि मध्य पूर्व और दक्षिण एशियाई देशों के पर्यटकों की संख्या बढ़ने से विकसित देशों के पर्यटकों की संख्या में आई कमी की कुछ भरपाई हो जाएगी।
उद्योग मंडल के महासचिव डीएस रावत ने पर्यटन क्षेत्र के बारे में इस अनुमान को यहाँ जारी करते हुए कहा कि देश में आने वाले पर्यटकों की संख्या में ही नहीं, बल्कि देश से बाहर जाने वाले पर्यटकों की संख्या में भी 5 से 7 प्रतिशत तक कमी आने की आशंका है।
एसोचैम द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक इस साल दिवाली से ही मौज मस्ती और सैर सपाटे वाले पर्यटन में उल्लेखनीय कमी दिखाई देने लगी थी। यह रुख आगामी क्रिसमस और नए साल के दौरान भी देखने को मिल सकता है। ऐसे गंभीर मौके पर सरकार की तरफ से लिए जाने वाले निर्णय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
सरकार को पर्यटन क्षेत्र में ट्रेवल क्षेत्र को बढावा देने के लिए शून्य कमीशन पर विचार करना चाहिए ताकि कम से कम पर्यटन कारोबार में नौकरियों पर आँच नहीं आए।
रावत का कहना है कि पर्यटन क्षेत्र में इस साल 15 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन अब इसकी 5 प्रतिशत तक नीचे चले जाने की आशंका बनी है, क्योंकि वैश्विक मंदी का असर अब चीन के अलावा समूचे मध्यपूर्वी एशियाई देशों और आंशिक तौर पर दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों पर भी देखा जा रहा है।
रावत के मुताबिक एसोचैम पर्यटन सर्वेक्षण में भी ऐसी बुरी तस्वीर पेश नहीं की गई है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं से देश में आने वाले अथवा जाने वाले पर्यटकों की संख्या में जो कमी आएगी उसकी काफी कुछ भरपाई मध्यपूर्व के देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या से हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जहाँ तक विदेशी मुद्रा कमाई की बात है इस साल उस पर बड़ा असर नहीं पड़ने वाला है। बेशक अमेरिका और यूरोप की तरफ से पर्यटक कुछ कम होंगे लेकिन उसकी भरपाई मध्य पूर्व के देशों की तरफ से होने लगेगी। |