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संकट निवेश का नहीं, तरलता का है
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने देश में म्युचुअल फंड के कारोबार को क्लीन चिट देते हुए कहा कि उनका संकट निवेश का नहीं बल्कि तरलता का है।

इंडो मलेशिया पूँजी बाजार फोरम के एक समारोह के दौरान सेबी अध्यक्ष सीबी भावे ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए नियम शर्तों में परिवर्तन करने में कुछ समय और लगेगा।

उन्होंने कहा कि देश में विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए सभी नियमों की व्यापक समीक्षा की जाएगी और सुझावों के लिए सलाहकारी परिपत्र जारी करने में वक्त लगेगा। भावे ने शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल को देखते हुए शॉर्ट सेलिंग की बिकवाली पर तत्काल कोई प्रतिबंध लगाने की संभावना को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में विदेशी संस्थागत निवेशक शुद्ध बिकवाल रह जाएँगे। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल भारत में ही नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में मौजूद है। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशक लिवाली भी कर रहे हैं किन्तु वह शुद्ध बिकवाल हैं।
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