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अब आईपीओ मामले में पिछड़ा अमेरिका
वैश्विक वित्तीय संकट से जूझ रहे भारतीय आईपीओ बाजार में पिछले महीने सिर्फ एक आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) आया, लेकिन यह स्थिति अमेरिका से बेहतर है, जहाँ उक्त अवधि के दौरान एक भी आईपीओ नहीं आया।

पिछले छह साल में यह पहला मौका है, जब विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और पूँजी बाजार में सितंबर के महीने में एक भी आईपीओ दर्ज नहीं हुआ।

भारत के प्राथामिक बाजार में 20 माईक्रॉन इकलौती कंपनी रही, जिसने सितंबर के महीने में आईपीओ लाने की हिम्मत दिखाई, जबकि वैश्विक संकट स्थानीय शेयर बाजारों को प्रभावित करता रहा।

मजे की बात यह है कि इस पेशकश को चार गुना अभिदान प्राप्त हुआ। इस पेशकश का मूल्य 55 रुपए प्रति शेयर रखा गया था, जो मूल्य दायरे का उच्चतम स्तर था।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक बाजार थम-सा गया है, क्योंकि द्वितीयक बाजारों में गिरावट का रुख है, जो कंपनियों को चालू वित्तीय स्थिति में पूँजी बाजार में प्रवेश करने से रोक रहा है।

रेलीगेयर सीक्योरिटीज के अध्यक्ष इक्विटी अमिताभ चक्रवर्ती ने कहा निश्चित तौर पर प्राथमिक प्राथमिक बाजार थम-सा गया है और हाल के दिनों में कंपनियों का धन जुटाना मुश्किल हो रहा है। मौजूदा अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के मद्देनजर हमें उम्मीद है कि धन जुटाने की योजना बना रही कंपनियों को कुछ और समय तक इंतजार करना पड़ेगा, तब तक बाजार में स्थिरता लौट आए।
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