पेट्रोलियम मंत्रालय ने लागत को कम करने की दिशा में आधे-अधूरे प्रयासों के लिए सरकारी तेल कंपनियों की खिंचाई की है। कंपनियों के सीमित प्रयासों के कारण उन्हें ईंधन की बिक्री में भारी घाटा हो रहा है।
तेल कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य की समीक्षा के लिए सीईओ के सम्मेलन में पेट्रोलियम सचिव आरएस पांडेय ने कहा कि कंपनियों को सहयोग के लिए सरकार की ओर देखना बंद करना होगा और इसके बदले अपने घाटे को कम करने के लिए खर्च में कटौती करनी होगी।
अगस्त के पहले पखवाड़े में कच्चे तेल के औसत मूल्य पर आधारित खुदरा विक्रेता कंपनियाँ- इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम पेट्रोल पर 7.07 रुपए प्रति लीटर डीजल पर 16.22 रुपए प्रति लीटर कैरोसिन पर 39.55 रुपए प्रति लीटर तथा 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर पर 348.89 रुपए का घाटा सह रही हैं।
इन तीन कंपनियों को पूरे वित्तवर्ष में अब 184 801 करोड़ रुपए का घाटा होने का अनुमान है। एक पखवाड़ा पहले उन्हें वर्ष 2008-09 में 205 740 करोड़ रुपए का घाटा होने का अनुमान था। पांडेय ने मुख्य कार्याधिकारियों को कहा कि वे बेकार खर्च में कटौती करें तथा घाटे को कम करने के लिए क्षमता में वृद्धि करें।
उन्होंने सीईओ से घरेलू एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने तथा अगले एक से दो महीनों में नए कनेक्शन की प्रतीक्षा सूची को खत्म करने को भी कहा। तेल कंपनियों को डीजल की आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाने को कहा गया है क्योंकि देश के कुछ हिस्सों में इसके कमी की खबर है।
|