मुख पृष्ठ > खबर-संसार > व्यापार > समाचार > दफन होंगी चतुर्वेदी की सिफारिशें
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
दफन होंगी चतुर्वेदी की सिफारिशें
महँगाई के मद्देनजर सरकार नहीं चाहती जोखिम
चुनाव के वर्ष में मुद्रास्फीति आँकड़े के 13 वर्ष के उच्चतम स्तर 12.44 प्रतिशत की ऊँचाई पर पहुँचने के साथ ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार लागत मूल्य की बराबरी होने तक ईंधन कीमतों में मासिक वृद्धि करने की बीके चतुर्वेदी समिति की सिफारिशों को नजरअंदाज करने के लिए तैयार बैठी है।

मार्च 2009 के अंत तक प्रति माह पेट्रोल की कीमत में 2.50 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि तथा डीजल की कीमत में वर्ष 2010 तक 0.75 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि करने की सलाह प्रधानमंत्री कार्यालय तक को स्वीकार्य नहीं है तथा तेलमंत्री मुरली देवड़ा द्वारा मंगलवार को उद्योग जगत की बैठक में इस रिपोर्ट को दफन किए जाने की रस्म निभाए जाने की संभावना है।

सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा जब तेल की वैश्विक कीमतों में गिरावट आ रही है। कोई भी ईंधन कीमतों में वृद्धि करने के बारे में सोच नहीं सकता। कच्चे तेल का मूल्य पिछले माह के 147 डॉलर प्रति बैरल की ऊँचाई से घटते हुए मौजूदा 113-114 डॉलर प्रति बैरल होने की वजह से ईंधन बिक्री के कारण होने वाले राजस्व हानि एक चौथाई घटकर 450 करोड़ रुपए प्रतिदिन हो गया।

तथापि राजसहायता प्राप्त कैरोसिन की बिक्री के लिए स्मार्ट कार्ड के इस्तेमाल जैसी कुछ सलाह को कुछ समर्थन मिल सकता है, जो बैठक देवड़ा की अगुआई में तेल कंपनियों के प्रमुखों की होने वाली है। इस बैठक में समिति की सिफारिशों के प्रभावों का ब्योरा दिया जाएगा तथा खुदरा ईंधन कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य की समीक्षा की जाएगी।

अमल में लाने की दिक्कतों की वजह से डीजल का दोहरा मूल्य निर्धारण यानी एक लक्जरी डीजल कार के लिए और दूसरा ट्रक एवं टैक्टरों के लिए को भी समर्थन नहीं मिल सकता है। सूत्रों ने बताया डीजल के लिए बड़ी कारों पर अधिक शुल्क लगाने के बजाय सरकार को ऐसी कारों पर यथामूल्य उत्पाद (एडवेलोरम) शुल्क लगाना चाहिए।

वर्ष 1999 से पहले अवॉर्ड किए गए तेल क्षेत्र से उत्पादित कच्चे तेल पर विशेष तेल कर लगाने के प्रस्ताव पर गर्मागर्म बहस हो रही है, क्योंकि कुछेक को यह एक दंडात्मक उपाय नजर आ रहा है।
और भी
आपूर्ति बाधित, कच्चे तेल में फिर तेजी
तेल कंपनियों का घाटा घटा
विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट
भारत दूसरे पायदान पर
वैश्विक स्थिति में सकारात्मक बदलाव संभव
सोना गिरा, चाँदी की चमक बरकरार