कालीमिर्च, लालमिर्च और जीरे की विदेशी बाजारों में जोरदार माँग रहने से चालू वित्त वर्ष के पहले दो माह अर्थात अप्रैल-मई 2008 में भारत से मसालों का निर्यात गत वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 20 प्रतिशत बढ़कर रहा है। गत वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में भारत ने 82 हजार 210 टन मसालों का निर्यात किया था, जो इस वर्ष के पहले दो महीनों में 98 हजार 570 टन पर पहुँच गया।
मसाला बोर्ड के अनुसार इस दौरान कालीमिर्च, लालमिर्च, धनिया, जीरा, सेलेरी, अन्य बीज मसाले, वनीला, करी पावडर, मसाला तेल एवं मिंट उत्पादों का निर्यात बढ़कर रहा। हालाँकि बडी इलायची, सौंठ एवं सौंफ का निर्यात घटा है। हल्दी, छोटी इलायची, लहसुन आदि मसालों के निर्यात की मात्रा तो घटी, परंतु भाव बढ़ने के कारण निर्यात प्राप्तियाँ बढ़कर रही हैं।
डॉलर की मजबूती के चलते इस दौरान निर्यात से होने वाली कुल आय 28 प्रतिशत बढ़कर 885.04 करोड़ रु. पर पहुँच गई, जो गत वर्ष अप्रैल-मई में 690.74 करोड़ रु. थी। मसाला तेल और मिंट उत्पादों का कुल निर्यात आय में 35 प्रतिशत योगदान रहा, जबकि लालमिर्च से होने वाली आय 27 प्रतिशत थी। निर्यात आय में इसके बाद कालीमिर्च (11 प्रतिशत), जीरा (7 प्रतिशत) और हल्दी (4 प्रतिशत) का स्थान रहा।
उक्त अवधि में कालीमिर्च का निर्यात 17 प्रतिशत बढ़कर 5750 टन पर पहुँच गया, जो कि अप्रैल-मई 2007 में 4920 टन रहा था। कालीमिर्च की निर्यात आय भी गत वर्ष की समान अवधि के 68.77 करोड़ रु. से बढ़कर इस वर्ष 94.28 करोड़ रु. रही। विश्व में कालीमिर्च के दूसरे बड़े उत्पादक और निर्यातक भारत के माल की माँग अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी और कनाडा में अच्छी रही।
इस दौरान 63.83 करोड़ रु. मूल्य के 65 हजार टन जीरे का निर्यात किया गया, जबकि पिछले साल 22.04 करोड़ रु. मूल्य के 2180 टन जीरे का निर्यात हुआ था। जीरा निर्यात में मात्रात्मक रूप से 198 तथा मूल्यात्मक रूप से 190 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। विश्व में जीरा उत्पादन में भारत प्रथम स्थान पर है। सीरिया और तुर्की जैसे जीरे के अन्य प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन कम होने से भारतीय माल की माँग तेजी से बढ़ रही है।
लालमिर्च का निर्यात 21 प्रतिशत बढ़कर 50 हजार टन (232.21 करोड़ रु.) पर पहुँच गया। मसाला तेलों का निर्यात 41 प्रतिशत बढ़कर 1500 टन रहा। मिंट उत्पादों की माँग में इस दौरान 21.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दो माह के दौरान इनका निर्यात 2900 टन रहा। धनिया का निर्यात गत वर्ष के 4570 टन की तुलना में बढ़कर इस वर्ष 6750 टन रहा। करी पावडर का निर्यात गत वर्ष के 1690 टन से बढ़कर इस वर्ष 2375 टन रहा।
इस अवधि में हल्दी, इलायची, सौंठ और सौंफ के निर्यात में गिरावट आई। घरेलू बाजार में अच्छे भाव मिलने से हल्दी का निर्यात 7.1 प्रतिशत घटकर 8550 टन रह गया। उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष में सरकार ने 4350 करोड़ रु. मूल्य के 4 लाख 25 हजार टन मसालों के निर्यात का लक्ष्य तय किया है। देश में कुल 40 लाख टन मसालों का उत्पादन होता है और यहाँ से 150 देशों में 180 किस्म के मसाले निर्यात किए जाते हैं।
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