फल, सब्जी, अनाज, लोहा एवं इस्पात जैसे कुछ विनिर्मित उत्पादों और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 13 साल के उच्चतम स्तर 11.63 फीसदी पर पहुँच गई।
जून 21 को समाप्त सप्ताह के दौरान मुद्रास्फीति 0.21 फीसदी बढ़कर 11.63 फीसदी हो गई, जो इसके पिछले सप्ताह 11.42 फीसदी थी और पिछले साल की समान अवधि में 4.32 फीसदी थी।
अशोधित तेल में हुई आठ फीसदी की बढ़ोतरी चाय में हुई चार फीसदी की बढ़ोतरी और फल, सब्जी, समुद्री मछली, मक्का एवं बाजरा में हुई दो-दो फीसदी की बढ़ोतरी के कारण थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी हुई। इसी तरह उड़द, मूँग और मसाले एक-एक फीसदी महँगे हुए।
सरकार द्वारा मूल्य पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों के बावजूद लोहा एवं इस्पात खाद्य तेल और सीमेंट जैसे उत्पाद इस सप्ताह के दौरान महँगे हुए।
तेजी से बढ़ती महँगाई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) और रेपो दर बढ़ाने पर मजबूर कर सकता है। आरबीआई 29 जुलाई को मौद्रिक नीति की समीक्षा कर सकती है।
क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डीके जोशी ने बताया मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक रेपो दर 25 आधार अंक और सीआरआर में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकती है।
आरबीआई ने 24 जून को पहले ही रेपो दर और सीआरआर में 0.5, 0.5 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। गोल्डमैन साक्स के मुताबिक आरबीआई अगले तीन महीनों के दौरान रेपो दर में 50 और सीआरआर में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकती है।
जोशी ने कहा कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ मुद्रास्फीति भी बढ़ेगी। गुरुवार को न्यूयॉर्क में अगस्त की डिलीवरी के लिए लाइट स्वीट कच्चे तेल की कीमत पहली बार 145 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई।
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