अंतरर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल के बावजूद भारत अपने यहाँ अक्टूबर से पहले तेल के दाम नहीं बढ़ाएगा।
पेट्रोलियम सचिव एमएस श्रीनिवासन ने यहाँ विश्व पेट्रोलियम कांग्रेस के दौरान भारत में पेट्रो पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की सम्भावनाओं के बारे में कहा अक्टूबर तक पेट्रोलियम पदार्थों में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। हालाँकि अक्टूबर में कीमतों की पुनर्समीक्षा हो सकती है।
गौरतलब है कि भारत में आखिरी बार जून में पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई थी।
अंतरर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देश भारत में तेल के दामों में उम्मीद से अधिक इजाफे का माँग पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
अगर दाम बढ़ते भी हैं तो केन्द्र सरकार तेल कम्पनियों के घाटे को कम करने के लिए आयात और उत्पाद शुल्क में कटौती कर देगी।
इंडियन ऑइल कॉपोरेशन के एक अधिकारी ने बताया जून में पेट्रो पदार्थों के दाम बढ़ाए जाने के बावजूद तेल कम्पनियों को हर दिन सात अरब से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।
श्रीनिवासन ने बताया भारत का तेल आयात खर्च 110 से 120 अरब डॉलर हो गया है और चालू वित्त वर्ष में भारत में पाँच-छह प्रतिशत अतिरिक्त कच्चे तेल की खपत होने की सम्भावना है।
उन्होंने कहा जून में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ने के बावजूद माँग में कोई कमी नहीं आई है। श्रीनिवासन के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष में सरकार का ईंधन पर सब्सिडी का खर्च 42.5 अरब डॉलर हो जाएगा।
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