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कोचिंग का कारोबार 10 हजार करोड़ का  Search similar articles
देश में चल रहे हजारों कोचिंग केंद्र प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में प्रवेश के इच्छुक करीब छः लाख छात्रों से हर साल लगभग 10 हजार करोड़ रु. कमाते हैं। शिक्षा के बाजारीकरण का यह चौंकाने वाला तथ्य उद्योग व्यापार जगत के संगठन एसोचैम के ताजा सर्वेक्षण से सामने आया है।

उच्च शिक्षा व्यवस्था की एक और खामी गिनाते हुए सर्वे में कहा गया है कि 80 हजार से 90 हजार छात्र शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। यदि हर छात्र 15 लाख रु. ही खर्च करता है तो भी विदेशी मुद्रा के रूप में देश का 10 हजार करोड़ रु. विदेशों में चला जाता है।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष जारी करते हुए एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल ने कहा कि कोचिंग केंद्र जितनी कमाई करते हैं उससे देश में एक वर्ष में 40 नए अखिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खोले जा सकते हैं। उन्होंने शिक्षा की वर्तमान प्रणाली को नियंत्रण मुक्त करने की वकालत करते हुए कहा कि इस समय चल रही व्यवस्था का फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं।

एक छात्र यानी 1.70 लाख रु. : सर्वे के अनुसार आईआईटी में प्रवेश का इच्छुक हर एक छात्र कम से कम एक लाख 70 हजार रु. कोचिंग पर खर्च करता है। इस प्रकार कुल छः लाख अभ्यर्थियों के जरिए कोचिंग केंद्र हर वर्ष 10 हजार करोड़ रु. की कमाई करते हैं। देश में हर वर्ष चार से पाँच लाख छात्र स्नातकोत्तर प्रबंधन शिक्षा के लिए आवेदन करते हैं।
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