आर्थिक थिंक टैंक आर्थिक विकास संस्थान (आईईजी) को अनुमान है कि अगले तीन महीनों में मुद्रास्फीति की दर घटकर 6.4 फीसदी हो जाएगी। फिलहाल यह 7.5 फीसदी है।
आईईजी ने कहा है ऐसा सरकार द्वारा उठाए गए राजकोषीय कदमों और रबी फसल की अच्छी पैदावार की संभावना के कारण होगा।
अपने ताजा मासिक जर्नल 'मंथली मॉनिटर' में आईईजी ने भविष्यवाणी की कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रा आपूर्ति कम करने के बावजूद ऋण दर स्थिर रहेगी।
मुद्रास्फीति के साथ पूँजी लागत में बढ़ोतरी और माँग में कमी के कारण चालू वित्त वर्ष में औद्योगिक उत्पादन की विकास दर घटकर आठ फीसदी रह जाएगी जो 2007-08 के फरवरी माह तक करीब नौ फीसदी थी।
आईईजी ने कहा हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मुद्रास्फीतिक दबाव घटकर सात फीसदी से नीचे चला जाएगा। मुद्रास्फीति की दरों में बढ़ोतरी आपूर्ति में कमी के कारण हुई। इसमें खाद्य तेल, लोहा और इस्पात जैसे जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य योगदान है।
हालाँकि सरकार द्वारा उठाए गए राजकोषीय कदमों से कुछ हद तक हालात सुधरेंगे। हाल में इस्पात कंपनियों द्वारा कीमतों में कटौती और रबी की अच्छी फसल के पुर्वानुमान से भी मुद्रास्फीति की बढ़ती दरों में कमी आएगी।
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