सरकार द्वारा कुछ कृषि कमोडिटी के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाए जाने के बीच व्यापारी और विश्लेषक चीनी, सोने और चाँदी के वायदा कारोबार को लेकर एकमत नहीं हैं।
चीनी और आभूषण व्यापारियों के एक वर्ग ने चीनी, सोने और चाँदी के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध की माँग की है, ताकि कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सके।
दूसरी ओर कमोडिटी बाजार विश्लेषक और आभूषण उद्योग का एक धड़ा इस माँग का विरोध कर रहा है। इनका कहना है कि इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने से उतार-चढ़ाव पर असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि इनकी कीमतें विदेशी मुद्रा गतिविधि व कच्चे तेल की कीमतों जैसे अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करती हैं।
दिल्ली अनाज व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष ओमप्रकाश जैन ने कहा कि कुछ कंपनियाँ वायदा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करती हैं। कमोडिटी की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी या गिरावट के लिए वे ही जिम्मेदार हैं।
कार्वी कामट्रेड के जी. हरीश ने हालाँकि कहा कि चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के लिए केवल अटकलबाजी ही जिम्मेदार कारण नहीं है। इससे उतार-चढ़ाव पर केवल पाँच प्रतिशत असर हो सकता है। मूल्य का उतार-चढ़ाव अमूमन देश में माँग व आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करता है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने सोया, ऑयल, आलू, रबर, और चने के वायदा कारोबार को प्रतिबंधित कर दिया है। पिछले साल चावल गेहूँ उड़द और तूर के वायदा कारोबार को प्रतिबंधित किया गया था।
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