देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में उम्मीदों से भी आगे बढ़कर 1883 करोड़ रु. का मुनाफा कमाया है, जो कि इससे पिछले साल की इसी तिमाही के शुद्ध मुनाफे की तुलना में 26.12 प्रतिशत अधिक रहा।
बैंक के अध्यक्ष ओपी भट्ट ने शुक्रवार को यहाँ बैंक के सालाना परिणाम जारी करते हुए बताया कि बैंक ने जनवरी से मार्च 2008 की चौथी तिमाही में 1883.25 करोड़ रु. का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में बैंक ने 1493.19 करोड़ रु. का मुनाफा कमाया था।
इस दौरान बैंक की ब्याज आय 17.63 प्रतिशत बढ़कर 13576.73 करोड़ रु. तक पहुँच गई। भट्ट के मुताबिक समाप्त वित्त वर्ष 2007-08 में बैंक का कुल मुनाफा 48.2 प्रतिशत बढ़कर 6729.12 करोड़ रु. रहा है, जबकि इससे पिछले वर्ष बैंक ने पूरे साल में 4541 करोड़ रु. का मुनाफा अर्जित किया था।
लागत में कमी कर मुनाफा कमाया : उन्होंने बताया कि बैंक ने बेहतर ग्राहक सेवा और प्रबंधन लागत में कमी लाकर बेहतर मुनाफा हासिल करने में सफलता पाई है। बैंक के निदेशक मंडल ने समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए बैंक के शेयरधारकों को प्रति शेयर 21.50 रु. के हिसाब से लाभांश देने की भी घोषणा की है।
भट्ट ने बताया कि खुदरा ऋण कारोबार में अच्छी बढ़त होने से बैंक के परिणाम बेहतर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में बैंक को कर्ज में 25 प्रतिशत तक वृद्धि की उम्मीद है। हालाँकि रिजर्व बैक ने इस साल के लिए बैंकों की ऋण वृद्धि 20 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद जताई है।
कर्ज वितरण 23 प्रश बढ़ा : सार्वजनिक क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक कुल बैंकिंग व्यवसाय का 23 प्रतिशत कारोबार करता है। बैंक ने बीते साल में कर्ज वितरण कारोबार में 23.4 प्रतिशत वृद्धि हासिल की है, जबकि इससे पिछले साल उसकी ऋण वृद्धि 30 प्रश तक रही। स्टेट बैंक के पास उपलब्ध धन की लागत अन्य बैंकों की तुलना में सबसे कम है। बैंक के पास ज्यादा पूँजी उसकी जमा राशि से आती है जिस पर 3.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देय है।
जमा पर ब्याज दर नहीं बदली : बैंक ने अपनी उधारी ब्याज दर आधा प्रतिशत कम करके फरवरी में 12.25 प्रतिशत तक कर दी थी। हालाँकि जमा पर ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था। इसके बावजूद बैंक की शुद्ध ब्याज आय मार्च में समाप्त तिमाही में 4550 करोड़ से बढ़कर 4800 करोड़ रु. तक पहुँच गई।
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