महँगाई पर लगाम लगाने की सरकार की मंशा के साथ कदमताल करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने आज वाणिज्यिक बैंकों को खाद्य पदार्थों की जमाखोरी में लगे व्यापारियों को ऋण सहायता देने से बाज आने का निर्देश दिया।
रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. वेणुगोपाल रेड्डी ने देश में सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र के सभी वाणिज्यिक बैंकों के प्रमुख की यहाँ बुलाई पारम्परिक बैठक में वर्ष 2008-09 की ऋण एवं मौद्रिक नीति जारी करते हुए उनसे ऐसे व्यापारियों को दिए ऋण आदि के मामलों की सावधिक समीक्षा कर उसकी रिपोर्ट इस केन्द्रीय बैंक को भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक को ऐसी पहली सावधिक समीक्षा की रिपोर्ट आगामी 15 मई तक मिल जानी चाहिए।
रेड्डी का कहना था कि जमाखोरों को बैंक तंत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति कतई नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि देश में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई है कि चावल, गेहूँ, दाल तथा खाद्य तेल आदि की जमाखोरी करने वाले व्यापारियों को इन जीन्स की खरीदारी ही नहीं, उन्हें गोदाम में रखने तक के भाड़े के लिए वाणिज्यिक बैंकों से ऋण दिए जा रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इसे रोकने के लिए रिजर्व बैंक के उपायों में वाणिज्यिक बैंक समुचित सहयोग देंगे।
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