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और अधिक दाल का आयात होगा
देश में चालू वित्त वर्ष में दाल-दलहन की बढ़ती माँग को देखते हुए पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक दालों का आयात करना होगा।

दाल-दलहन के कारोबार से जुड़े अधिकारियों और व्यापारियों का कहना है कि रबी मौसम में दलहनी फसलों की पैदावार कम होने की संभावना है, जिससे भारत को पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष और अधिक दाल का आयात करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

हाकन एग्रो डीएमसीसी के निदेशक सुधाकर तोमर ने बताया कि बीते मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष के दौरान देश में 29 लाख टन दाल का आयात किया है। रबी की फसल में दलहन की पैदावार 8.82 प्रतिशत घटकर 85 लाख 70 हजार टन रह जाने की संभावना है जबकि पिछले वर्ष यह 94 लाख टन रही थी।

तोमर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाल की बढ़ती कीमतों का असर आयात पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बढ़ती माँग की पूर्ति पैदावार से मुश्किल से हो पाती है और यदि किसी एक देश में भी फसल खराब हुई तो दाल की कीमतें बढ़नी निश्चित है।

देश में दाल आयातकों के संगठन (पीआईएआई) के अध्यक्ष केसी भारतीय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाल की कीमतें ऊँची हैं और उनके नीचे आने की कोई संभावना नहीं है इसलिए ऊँची कीमतों पर ही दाल का आयात करना होगा।

दाल की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए बीते वर्ष 15 लाख टन दालों का आयात किया गया। वर्ष 2007-08 में दालों की पैदावार अनुमानित एक करोड़ 43 लाख 40 हजार टन रही थी जबकि इससे पिछले वर्ष यह आँकड़ा एक करोड़ 42 लाख टन का था।
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