उद्योग जगत निर्यात बढ़ाने के लिए घोषित नए उपायों के लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ की तारीफ कर रहा है, पर उसे आशंका है कि महँगाई नियंत्रण के उपाय के रूप में कुछ वस्तुओं के निर्यात पर हाल की पाबंदिया आर्थिक वृद्धि दर पर उल्टा असर डाल सकती है।
उद्योग मंडल फिक्की के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध उद्योगपति हर्षपति सिंघानिया ने विदेश व्यापार नीति में वार्षिक संशोधनों पर एक बैठक में कहा कि उद्योग जगत यही चाहेगा कि मुद्रास्फीति के दवाब को कम करने के लिए हाल में किए गए उपायों का असर आर्थिक वृद्धि पर न पड़े।
कमलनाथ की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि ऐसा कोई उपाय ठीक नहीं होगा जिसमें आर्थिक वृद्धि की बलि चढ़ानी पड़े। उल्लेखनीय है कि सरकार ने महँगाई पर लगाम लगाने के लिए गेहूँ, गैर बासमती चावल और दाल जैसी आवश्यक वस्तुओं पर पाबंदी लगाने के साथ-साथ सीमेंट के निर्यात पर भी पाबंदी लगा दी। सरकार ने लोहा और कुछ अन्य वस्तुओं के निर्यात को निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के लाभ से बंचित करने का भी फैसला भी किया है।
सरकारी उपायों के बावजूद 29 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 7.41 प्रतिशत पर पहुँच गई जो पिछले साढ़े तीन साल में महँगाई के सबसे अधिक दवाब का संकेत है। प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों कहा था कि महँगाई का अर्थिक वद्धि पर असर पड़ सकता है और इसका दवाब और बढ़ा तो आर्थिक उदारीकरण के खिलाफ दवाब पैदा होगा।
कमलनाथ ने उपस्थित उद्यमियों के सवालों के जवाब में स्पष्ट किया कि सीमेंट के निर्यात पर लगी पाबंदी विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) से बेची जाने वाली सीमेंट पर लागू नहीं होगी। उन्होंने फिक्की से फोकस उत्पाद और फोकस मार्केट योजना में प्रस्तावित संशोधनों के विषयम में उद्योग जगत से 15 दिन के अंदर सुझाव आमंत्रित किए। उल्लेखनीय है कि ये योजनाएँ ऐसे चुनिंदा उत्पादों या चिह्नित बाजारों के संबंध में निर्यात बढ़ाने के लिए है जिनका निर्यात अभी कम है या जहाँ भारतीय सामान का प्रवेश अपेक्षाकृत कम है।
वाणिज्य मंत्री ने प्रस्तावित संशोधनों के बारे में उदाहरण देकर समझाया कि इस योजना को ऐसा लचीला रूप देने का निर्णय लिया गया है कि जिसमें जापान जैसा बाजार परिधानों के निर्यात के लिए फोकस मार्केट माना जा सकता है या जापान के लिए परिधान को फोकस प्रोडक्ट योजना के लाभ का पात्र बनाया जा सकता है।
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