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अमेरिका से ज्यादा निवेश किया है भारत ने
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने कहा कि भारत में जितना अधिक विदेशी निवेश हुआ है उससे कहीं अधिक उसने विदशों में किया है। इसके अलावा भारत ने अमेरिका की तुलना में कहीं अधिक निवेश और काम के इतने ज्यादा अवसर अमेरिका में पैदा किए हैं जितने अमेरिका ने भारत में नहीं किए।

भारतीय अर्थव्यवस्था की उपलब्धियों को दर्शाने के उद्देश्य से यहाँ आयोजित एक सम्मेलन में कमलनाथ ने कहा कि दोनों देशों के द्वारा साल 2005 में समग्र आर्थिक सहयोग पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद द्विपक्षीय व्यापार में 20 से 23 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भारत इस समझौते के माडल का उपयोग एक मुक्त व्यापार क्षेत्र की स्थापना के साथ आसियान देशों के बीच करना चाहता है। उन्होंने आशा जताई कि इस साल के मध्य तक इन देशों के साथ यह समझौता हो सकेगा।

सम्मेलन में भाग लेने आए भारतीय अधिकारियों ने बताया कि भारत अब केवल निवेश की ओर नहीं ताक रहा है बल्कि उसकी योजना दस आसियान देशों में निवेश की भी है। इस क्षेत्र की जनसंख्या लगभग 60 करोड़ है। यह निवेश उन तीन हजार भारतीय कारोबारियों के द्वारा होगा जो कि सिंगापुर से अपनी व्यापारिक गतिविधियाँ चला रहे हैं।

सिंगापुर के राष्ट्रपति ली हसेन लूंग ने दोनों देशों के मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि इस समय विश्व मंदी के दौर से गुजर रहा है लेकिन भारत की उपभोक्ता आधारित अर्थव्यवस्था ने दक्षिण एशियाई देशों को नई राह दिखाई है।

श्री ली ने जोर देकर कहा कि भारत और सिंगापुर के संबंध आपसी सम्मान और साझे हितों पर आधारित हैं। उन्होंने भारतीय आर्थिक कदमों को ऐतिहासिक रूपांतरण की संज्ञा देते हुए कहा कि भारत का रास्ता सतत संवृद्वि, अर्थिक जीवंतता और गतिशीलता का है जिसने विश्व के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने मित्तल स्टील और टाटा मोटर्स की मिसाल देते हुए कहा कि इन कंपनियों के काम से मालूम होता है कि भारत विश्व अर्थव्यवस्था के साथ किस तरह से जुड़ता जा रहा है। वैश्विक बाजारों पर पहले से कुछ कहना अत्प्रयाशित है लेकिन साठ साल के बाद भारत के बारे में कहना प्रत्याशित है खासतौर पर जब यदि पिछले एक दशक में इसकी आर्थिक उपलब्धियों को ध्यान में रखा जाए।
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