संयुक्त राष्ट्र की एक एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी बाजार में मंदी का एशिया प्रशांत क्षेत्र के निर्यात पर असर पड़ेगा, लेकिन इसका भारत की आर्थिक वृद्धि पर कोई खास असर नहीं होगा।
संयुक्त राष्ट्र के एशिया प्रशांत क्षेत्रीय आर्थिक एवं सामाजिक सर्वेक्षण 2008 में कहा गया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था वहाँ के गृह ऋण बाजार का गुब्बारा फटने से मंदी में चला जाता है तो उसका एशिया और प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यस्थाओं पर मुख्य प्रभाव उनके निर्यात क्षेत्र के रास्ते आएगा।
मंदी की स्थिति में अमेरिका ब्याज दरों में जोरदार कमी कर सकता है जिससे डॉलर की विनिमय दर और गिरेगी इससे एशिया प्रशांत क्षेत्र के देशों पर दो तरह की मार पड़ेगी। एक तो उनके निर्यात की माँग में कमी और उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता में कमी आएगी।
इससे अमेरिकी बाजार में बहुत ज्यादा जुड़े चीन जैसे देशों की आर्थिक वृद्धि में थोड़ी कमी हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अप्रेक्षाकृत बंद अर्थव्यवस्था है और देश का निर्यात इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के केवल 13 प्रतिशत के बराबर है। ऐसे में भारत अमेरिकी मंदी के कारण विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर गिरने के प्रभावों से अप्रभावित रहेगा।
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