वित्त मंत्रालय कई वित्तीय सेवाओं और लेनदेन में स्थाई खाता संख्या (पैन) को अनिवार्य करने की तैयारी कर रहा है। इनमें कंपनियों के फिक्स डिपाजिट या राष्ट्रीय बचत पत्र प्रमुख रूप से शामिल है।
पैन 10 अंकों का अल्फा-न्यूमेरिक टैक्स पेयर आईडेंफिकेशन नंबर है, जो व्यक्ति की पहचान के लिए जारी किया जाता है। इसका एक मकसद उस व्यक्ति के द्वारा किए गए कई लेनदेन और सूचनाओं की पुष्टि करना भी होता है। फिलहाल आयकर के सभी रिटर्न्स में इसका उल्लेख करना अनिवार्य है।
बजट में किया था प्रस्ताव : पी. चिदंबरम ने बजट भाषण में कहा था कि पैन का भय वस्तुतः खत्म हो गया है। प्रतिभूति बाजार के सभी भागीदारों की पहचान के लिए अब पैन एकमात्र जरिया बन गया है। चिदंबरम ने बजट में प्रस्ताव किया था कि वित्तीय बाजार के सभी लेनदेन में पैन अनिवार्य बना दिया जाएगा।
वित्त मंत्रालय की कवायद : वित्त मंत्रालय अब कई किस्म के लेनदेन पर इसे अनिवार्य बनाने की तैयारी कर रहा है। इसमें प्रमुख है-बीमा, बैंकिंग, कतिपय छोटी बचतें। इनमें पैन को अनिवार्य बनाया जा सकता है। पैन को अनिवार्य तय सीमा से अधिक के निवेश पर ही अनिवार्य बनाया जाएगा। पैन कर अधिकारियों को संबंधित के बारे में ऑडिट करने में सहायता करता है।
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