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पेट्रोल, डीजल पर 8 प्रतिशत वैट लगे
उद्योग मंडल एसोचैम ने पेट्रोल और डीजल ने कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बेतहाश वृद्धि और कंपनियों पर बढ रहे भार को देखते हुए पेट्रोल एवं डीजल पर आठ प्रतिशत की समान दर से मूल्य वर्द्धित कर (वैट) लगाए जाने का सुझाव दिया है।

पेट्रोलियम उत्पादों के कर ढांचे के सबंध में आज यहाँ एक रिपोर्ट जारी करते हुए एसोचैम अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत ने कहा कि राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर बिक्री कर के अतिरिक्त कच्चे तेल पर 2 से चार प्रतिशत तक की चुंगी भी लगाती है जिससे तेल कंपनियों पर अतिरिक्त कर का बोझ बढता है1

उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर सरकार द्वारा ब्रिकी समाप्त कर देने के बावजूद विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पर 18.9 से 33 प्रतिशत और डीजल पर 8.23 से 34 प्रतिशत तक की दर से बिक्र ी कर लगा हुआ है जिससे तेल कंपनियों पर कर का बोझ 140 फीसदी तक पहुँच जाता है जिससे उनकी आमदनी पर असर पड़ रहा है।

धूत ने कहा कि इस समस्या को देखते हुए ही सरकार से सिफारिश की जा रही है कि वह पेट्रोल और डीजल पर 8 प्रतिशत की समान दर से वैट लगाए।

एसोचैम के मुताबिक डीजल और पेट्रोल पर उपकर लगा कर अब तक सरकार 65 हजार करोड़ रुपए वसूल चुकी है यह राशि किस मद में खर्च की गई है इसकी जानकारी किसी को नहीं है जबकि कायदे से यह राशि पेट्रोलियम क्षेत्र के विकास पर खर्च की जानी चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों से हालाँकि तेल कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है लेकिन वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से चालू वित्त वर्ष में उनका कुल घाटा 80 करोड़ रुपए तक पहुँचने की आंशका है।

धूत ने साथ ही यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को निजी क्षेत्र की कंपनियों के समान ही पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
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