मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > व्यापार > समाचार
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
प्रति व्यक्ति आय 10 हजार रु. बढ़ी!
देश के महानगरों और शहरों में रोजगार के अवसरों में हो रही वृद्धि के कारण अगले 4 वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में नगरीय आबादी के योगदान में 16 प्रश वृद्धि होने की संभावना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) की ओर से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, कोच्चि, पुणे, अहमदाबाद, चंडीगढ़, देहरादून और जयपुर घरेलू विदेशी वित्तीय आधारित गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में उभरेंगे।

वर्तमान में है 26 हजार रुपए आय
आगामी 5 वर्षों में इन महानगरों और बड़े शहरों में आधारभूत ढाँचे और उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए पर्याप्त मात्रा में निवेश होगा। इसके कारण शहरी जनसंख्या के प्रति व्यक्ति आय में कम से कम 10 हजार की वृद्धि होगी और यह 36 हजार प्रतिवर्ष तक पहुँच जाएगी। वर्तमान समय में शहरी क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय 26 हजार प्रतिवर्ष के करीब है। वर्ष 2004 के दौरान प्रति व्यक्ति आय 23 हजार रुपए प्रतिवर्ष थी, जो 2005-2006 में बढ़कर 25 हजार रु. प्रतिवर्ष हो गई ।

तकनीकी दक्ष के लिए अवस
आने वाले वर्षों में महानगर और शहरों में सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना तकनीक सेवाओं और जैव तकनीक में विशेषज्ञता प्राप्त पेशेवरों के लिए बहुउद्देश्यीय रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

25 प्रश जनसंख्या नगरों मे
भारत विश्व में ऐसा दूसरा सबसे बड़ा देश है, जहाँ नगरों में सबसे अधिक जनसंख्या निवास करती है। वर्ष 1991 में जहाँ नगरों में कुल जनसंख्या की 25 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती थी, वहीं यह संख्या 2001 में बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई। वर्तमान आँकड़ों के अनुसार नगरों में देश की कुल आबादी की 28 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है जिसका सरकारी राजस्व में 90 प्रतिशत का योगदान होता है।

एक अनुमान के मुताबिक सरकारी राजस्व में इसका योगदान वर्ष 2011 तक 30 प्रतिशत हो जाएगा। इसके साथ ही गत दशक की तुलना में इस दशक में नगरीय क्षेत्रों में रोजगारों में 38 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

शहरों की संख्या बढ़
वर्ष 1991 में देश में नगरों और शहरों की संख्या 3,768 थी, जो कि वर्ष 2001 में 4,368 हो गई। इसके वर्ष 2011 तक 5,000 होने का अनुमान है। देश में जारी जबर्दस्त आर्थिक गतिविधियाँ ही नगरों में बढ़ रही आबादी का प्रमुख कारण है।

सरकार ने अगले 7 वर्षों में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों में विकास के लिए 1 लाख करोड़ रुपए खर्च कर जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण योजना की शुरुआत की। हालाँकि अगले 7 वर्षों में नगरों के विकास के लिए आधारभूत ढाँचे, रिहायशी क्षेत्रों और मल-जल निकासी आदि सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए अतिरिक्त 1 लाख करोड़ रु. का निवेश किया जाएगा।

बुनियादी विकास की जरूर
एक अनुमान के मुताबिक अगले 10 वर्षों में शहरों में जलापूर्ति, मल-जल निकासी और सड़कों के विकास के लिए करीब 28,035 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में परिवहन सेवा के विकास के लिए अगले 10-15 वर्षों में 207 हजार करोड़ रु. की जरूरत होगी।

देश के प्रमख शहरों में बढ़ती जनसंख्या, पर्यावरणीय बदलाव और जीवनस्तर में गिरावट के कारण आधारभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने में बहुत समस्या उत्पन्न हो रही है। अनुमानों के अनुसार देश की शहरी जनसंख्या में से एक तिहाई लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं।

साफ पानी मुहैया नही
इसके साथ ही शहरों में निवास करने वाले लोगों में से 15 प्रतिशत को पीने का साफ पानी मुहैया नहीं हो पाता तथा 50 प्रतिशत जनसंख्या के लिए स्वस्थ एवं साफ-सुथरा वातावरण उपलब्ध नहीं होता। कई शहरों में निजी वाहनों की संख्या में हुई अत्यधिक वृद्धि, अपर्याप्त स्थान और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की अनुपलब्धता के कारण सड़कों पर यातायात का अत्यधिक दबाव है। कई शहरों में आधाभूत ढाँचे एवं आवश्यक सुविधाओं की माँग और आपूर्ति में भारी अंतर है।
और भी
कैसे लगी सब प्राइम की आँच!
लुब्रिकेंट पर आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी
गेहूँ के बड़े खरीददारों को देनी होगी सूचना
कतर में पेट्रो रसायन कांप्लेक्स की इच्छुक रिलायंस
भारत और भूटान ने परियोजनाओं की समीक्षा की
लाइफलाइन योजनाओं का शुभारम्भ