दुनिया की दूसरी बड़ी महाशक्ति कहलाने वाले रूसियों को अटकलों के भरोसे छोड़े हुए टाटा समूह ने यह राज नहीं खोला है कि वह अपनी लखटकिया चमत्कार 'नैनो' को रूस के अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मेले में ले जा रहे हैं या नहीं।
इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद के कार्यकारी निदेशक आर. मैत्रा ने यहाँ रूसी केंद्र में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस मेले में भारत के 300 उद्यमी और करीब 145 कम्पनियाँ अपने उत्पाद ले जा रही हैं, लेकिन टाटा समूह ने इस बात खुलासा नहीं किया है कि वे रूसियों के नयनों को भा रही नैनो उन्हें साक्षात दिखाने के लिए ले जाएँगे या नहीं।
मैत्रा ने कहा कि शायद टाटा ने रूसियों को ताज्जुब में डालने का मन बनाया हुआ हो। उन्होंने कहा कि नैनो के बारे में रूसियों की बेताबी को देखते हुए परिषद ने टाटा से सम्पर्क किया लेकिन उनकी ओर से इतना ही जवाब आया कि टाटा इस प्रदर्शनी में हिस्सा लेंगे। उन्होंने नैनो को सेंटपीटर्सबर्ग ले जाने के बारे में पुष्टि करने से इंकार कर दिया।
मेले का आयोजन 11 मार्च से किया जा रहा है और इसमें रूसी आयोजक कंपनी रेस्तेक के महानिदेशक इगोर क्रिसानोफ के अनुसार इंडी नामक प्रदर्शनी के लिए भारत को सहयोगी आयोजक बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि इस दौरान मास्को चैम्बर ऑफ कामर्स और सेंटपीटर्सबर्ग चैम्बर ऑफ कामर्स के साथ उनकी परिषद का सहमति का करार होने की सम्भावना है और इन दोनों चैम्बरों को भारत में अपनी प्रदर्शनी लगाने के लिए भी आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि रूस में इंजीनियरिंग का बाजार 52 अरब डॉलर सालाना है और इसमें भारत का हिस्सा महज 0.1 प्रतिशत है।
इसे अगले तीन साल में एक प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। पिछले साल भारत ने रूस को 12 करोड़ 35 लाख डॉलर के इंजीरियरिंग उत्पादों का निर्यात किया जो इससे पिछले साल के कारोबार से 48 प्रतिशत अधिक है।
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