वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने जहाँ एक तरफ बैंकों से किसानों को ज्यादा से ज्यादा कर्ज उपलब्ध कराने पर जोर दिया है, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि किसानों की कर्ज माफी योजना के तहत बैंकों के नुकसान की पूरी भरपाई की जाएगी।
वर्ष 2008-09 का आम बजट पेश करने के बाद रिजर्व बैंक निदेशक मंडल के साथ होने वाली नियमित बैठक को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि उनके इस बजट से आर्थिक वृद्धि की तेज रफ्तार बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि उत्पाद एवं आयकर दरों को कम करके उचित स्तर पर लाया गया है इसके पीछे यही उद्देश्य है कि लोगों की खरीदारी और उपभोक्ता माँग तेजी से बढ़े। इसके साथ ही बजट में सार्वजनिक व्यय विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी खर्च बढ़ाए गए हैं।
चिदंबरम ने रिजर्व बैंक बोर्ड सदस्यों को आश्वस्त किया कि निवेश की वर्तमान तेज रफ्तार को भी बनाए रखे जाने के हर संभव उपाय किए गए हैं। बजट में एक तरफ उपभोक्ता माँग बढ़ाने के उपाय हैं तो दूसरी तरफ निवेश को प्रोत्साहित किया गया है इससे अर्थव्यवस्था में मंदी के जो खतरे दिखाई दे रहे हैं, वह काफी हद तक दूर होंगे। उन्होंने किसानों की कर्ज माफी योजना के पीछे की सोच का भी खुलासा किया।
उन्होंने कहा कि छोटे और मझोले किसानों के कल्याण के लिए यह पैकेज लाया गया है। इससे बैंकों को कोई नुकसान नहीं होगा। उनकी पूरी राशि उन्हें मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को कर्ज का और विस्तार हो और उन्हें बैंकों से आसानी से कर्ज मिले इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
रिजर्व बैंक निदेशक मंडल सदस्यों ने इससे पहले एक स्वर में वित्तमंत्री को उम्मीद से भी बढ़कर बजट लाने के लिए बधाई दी। रिजर्व बैंक गवर्नर वाईवी रेड्डी ने बजट को आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ मूल्यों में स्थिरता रखने के उद्देश्य की लाइन पर तैयार बताया।
उन्होंने वित्तमंत्री को आश्वासन दिया कि किसानों की ऋण माफी योजना पर तय समय सीमा के भीतर अमल किया जाएगा ताकि किसानों के हितों को साधा जा सके और कृषि क्षेत्र में कर्ज विस्तार हो सके।
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