केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम देश की तीव्र आर्थिक विकास दर को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि 2008-09 में आर्थिक विकास की दर कम से कम 8.8 प्रतिशत रहेगी।
चिदंबरम ने बुधवार को यहाँ प्रमुख उद्योगपतियों की बैठक में कहा कि उन्हें अर्थव्यवस्था की तीव्र आर्थिक वृद्धि दर को लेकर कोई शंका नहीं है। उन्होंने कहा कि आगामी वित्त वर्ष में माँग बढ़ेगी और इसे देखते हुए 8.8 प्रतिशत से ऊपर आर्थिक विकास की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर में 8.7 प्रतिशत का अनुमान व्यक्त किया गया है। उल्लेखनीय है कि 2006-07 में पिछले 18 वर्ष की अधिकतम 9.6 प्रतिशत की विकास दर रही थी।
उधारी नियमों पर पुनर्विचार : चिदंबरम ने उद्योगपतियों को आश्वासन दिया है कि कंपनियों के विदेशों से उधारी नियमों पर पुनर्विचार किया जाएगा। देश में बड़े पैमाने पर आ रही विदेशी मुद्रा को नियंत्रित करने के लिए घरेलू कंपनियों के विदेशों से धन जुटाने के नियम कड़े कर दिए थे।
विदेशी मुद्रा के प्रवाह के चलते रुपए के मजबूत होने से निर्यात पर असर पड़ रहा था। कंपनियाँ रिजर्व बैंक की अनुमति लिए बिना विदेशों से 50 करोड डॉलर तक जुटा सकती हैं। किंतु इसमें से केवल देश में दो करोड़ डॉलर ही निवेश हो सकता है।
उपभोक्ता के पास अधिक राशि : वित्त मंत्री ने उच्च विकास दर के संबंध में कहा कि आम बजट में कर में दी गई रियायतों से उपभोक्ताओं के पास खर्च करने लिए अधिक राशि होने के साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र का निवेश अधिक होगा जिससे अगले वित्त वर्ष में रफ्तार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
चिदंबरम ने कहा कि देश में बड़े पैमाने पर आ रहे विदेशी धन को अस्थाई रूप से रोकने के लिए कदम उठाए गए थे और बाह्य वाणिज्यिक उधारी के रास्ते को बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा- स्थिति ठीक हो जाने पर सरकार निश्चित रुप से इसमें ढील देगी।
कृषि क्षेत्र की मंद विकास दर पर चिंता व्यक्त करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था की कुल विकास गति पर असर पड़ रहा है। घटते निवेश और पैदावार में स्थिरता के चलते चालू वित्त वर्ष में इसकी रफ्तार के घटकर 2.6 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है।
|