डॉलर के कमजोर होने और ओपेक के तेल उत्पादन नहीं बढ़ाने के समाचारों के बीच सोमवार को भी कच्चा तेल 102 डॉलर प्रति बैरल बोला गया।
अमेरिका में कच्चे तेल के दाम अप्रैल डिलीवरी के लिए 16 सेंट बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल रहे। लंदन ब्रेंट भी 21 सेंट बढ़कर 100.31 डॉलर प्रति बैरल रहा।
कमोडिटी वारंटस् ऑस्ट्रेलिया में अनुसंधान प्रमुख रोवन मेंजीज ने कहा कि इस समय तेल की कीमतें बढ़ने का प्रमुख कारण डॉलर का कमजोर होना है। निवेशकों ने कच्चे तेल की आपूर्ति रोक ली है क्योंकि तेल निर्यातक राष्ट्र संगठन (ओपेक) की पाँच मार्च को होने वाली बैठक में तेल उत्पादन में कटौती करने की संभावना है।
कच्चे तेल का मूल्य निर्धारण अमेरिकी डॉलर में होता है इसलिए जब डॉलर कमजोर होता है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों में झलकता है और इसके दाम चढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अमेरिकी मंदी भी एक चिंता का विषय है लेकि न फिलहाल दाम बढने का कारण नहीं है।
विश्व की प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलरमें रिकॉर्ड गिरावट हुई है जिसके कारण फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती करने की संभावनाएँ बढ़ गई है। शुक्रवार को डॉलर के कमजोर होने, इक्वाडोर से आपूर्ति बाधित होने और यूरोप के प्राकृतिक गैस आपूर्ति संयंत्र में आग लगने से कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड 103.05 पर पहुँच गए थे।
ओपेक के सदस्य देशों लीबिया और वेनेजुएला ने कहा है कि पाँच मार्च को विएना में होने वाली बैठक में तेल उत्पादन में कोई बदलाव नहीं करने की संभावना है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिमी एशिया, दक्षिणी अमेरिका और नाईजीरिया में तनाव की स्थिति से भी कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं। हालाँकि ये संकट की स्थिति नई नहीं है लेकिन इनका असर पड़ता है।
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