देश के प्रमुख वाणिज्यिक उद्योग मंडलों ने आर्थिक समीक्षा में उच्च विकास दर के साथ महँगाई पर काबू पाने के लिए आर्थिक सुधारों के तेजी से क्रियान्वयन की वकालत की है। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी हरित क्रांति की जरूरत बताई है।
भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल महासंघ (फिक्की) के एक बयान में कहा गया कि संसद में गुरुवार को पेश की गई वर्ष 2007-2008 की आर्थिक समीक्षा में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू आर्थिक वातावरण में आर्थिक सुधारों को जारी रखने पर जोर दिया गया है। फिक्की ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय बजट में वित्तमंत्री पी. चिदंबरम आर्थिक सुधारों को जारी रखेंगे।
फिक्की ने आर्थिक समीक्षा में आर्थिक विकास दर 9 प्रतिशत रखने पर सहमति व्यक्त की और कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की हालत और देश में बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण इसे बनाए रखना खासा मुश्किल होगा। फिक्की ने चीनी, उवर्रक और दवाओं को भी नियंत्रण मुक्त करने पर सहमति जताई और कहा कि यह आर्थिक सुधारों में शामिल होना चाहिए।
इसके अलावा फिक्की ने खुदरा बाजार में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को मंजूरी देना, बीमा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की 49 प्रतिशत की सीमा हटाने और नवरत्न कंपनियों के 10 प्रतिशत शेयर बेचने से भी सहमति व्यक्त की।
दूसरे प्रमुख व्यावसायिक संगठन एसौचेम ने कृषि क्षेत्र पर ध्यान देने की जरूरत बताते हुए दूसरी हरित क्रांति की आवश्यकता पर जोर दिया है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में कृषि विकास दर 2.6 प्रतिशत रही है, जबकि पिछले वर्ष यह 3.8 प्रतिशत थी।
एसौचेम के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत ने उम्मीद जताई कि आर्थिक समीक्षा में दर्शाई गई सभी चिंताओं से निपटा जाएगा, जिससे देश की 11वीं पंचवर्षीय योजना में 9 प्रतिशत की विकास दर हासिल की जा सके। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कुछ विशेष घटनाएँ हो रही हैं, जैसे सकल घरेलू उत्पाद में व्यापार का हिस्सा वर्ष 2006-07 में बढ़कर 34.18 प्रतिशत हो गया है, जबकि वर्ष 2001-02 में यह 22.5 प्रतिशत था।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष एलके मल्होत्रा ने आर्थिक समीक्षा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बढ़ती मुद्रास्फीति चिंता का विषय है। ब्याज दर बढ़ने से उपभोक्ताओं की विक्रय क्षमताएँ कम हो रही हैं। मजबूत होता रुपया भी मुश्किलें पैदा कर रहा है। हालाँकि उन्होंने इससे सहमति जताई कि मुद्रास्फीति से निपटने के लिए नीति बनाई जाएगी।
उन्होंने इससे असहमति जताई कि वर्ष 2009 में राजस्व घाटे पर काबू पा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके लिए केवल माँग बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि सतत विकास के लिए निवेश सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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