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डब्ल्यूटीओ में जारी मसौदों का स्वागत-कमलनाथ
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) वार्ताओं के सिलसिले में जिनेवा में जारी मसौदा प्रस्तावों का प्रारंभिक दृष्टि से स्वागत किया है लेकिन कहा है कि इस पर अंतिम राय अन्य मंत्रालयों और पक्षों से बात करके जारी की जाएगी।

कमलनाथ ने बुधवायहासंवाददाताओं से कहा कि कृषि और औद्योगिक वस्तुओं के बाजार के बारे में अलग-अलग वार्ता समूहों के अध्यक्षों द्वारा आठ फरवरी को जारी मसौदे प्रस्तावों को जोड कर एक सहमति बनाने की कोशिश की गयी है1

कमलनाथ ने कहा कि इन मसौदों पर अंतिम राय अन्य मंत्रालयों और अन्य सम्बध घरेलू पक्षों से बातचीत के बाद ही व्यक्त की जा सकती है1

उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि विकसित देशों के बाजार में कृषि उत्पादों के शुल्क में न्यूनतम 54 प्रतिशत और विकासशील देशों के बाजार में अधिकतम 36 प्रतिशत शुल्क कटौती का जी-20 देशों का मूल प्रस्ताव फिर बातचीत के एजेंडा पर आ गया है।

कमलनाथ ने कहा कि विकसित देशों की कृषि सब्सिडी में कारगर कटौती एक बडा मुद्दा है1 इस पर समझौता हमारे लाखों गरीब किसानों की रोजी रोटी प्रभावित होती है1

कमलनाथ ने कहा कि कृषि समिति के अध्यक्ष ने विशेष उत्पाद (एसपी), सुरक्षा के विशेष उपाय (एसएसएम) विशेष बचाव.ऊष्ण कटिबंधीय उपाय और शुल्क सरलीकरण जैसे मुद्दों पर कुछ नये प्रस्ताव रखे हैं। इन पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है।

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि विशेष उत्पादों के मुद्दे पर काफी कार्य करने की जरूरत है। भारत पहले से कहता रहा है कि किसानों की रोजी-रोटी की दृष्टि से वह पर्याप्त संख्या में अपने विशेष उत्पाद की श्रेणी रखवाना चाहेगा। इन उत्पादों पर शुल्क कटौती की शर्त लागू नहीं होगी। कमलनाथ ने कहा कि एसएसएम संबंधी मसौदा की अव्यावहारिक लगता है।

गैर कृषि उत्पादों यानी औद्योगिक वस्तुओं के बाजार के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें शुल्क कटौती का तथाकथित स्विस फार्मूला बना हुआ है जिसके विकासशील देश विरोध करते रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि विकासशील देशों को पैरा-8 के तहत रियायत देने का प्रस्ताव हटा लिया गया है जबकि यह प्रस्ताव 2004 से चला आ रहा था। इसके तहत विकासशील देशों को अपने छोटे और कमजोर उद्योगों को प्रतिस्पर्धा से बचाने की छूट देने की बात की।

कमलनाथ ने कहा कि संशोधित मसौदे आने वाले सप्ताहों में रचनात्मक बातचीत का आधार बन सकते हैं। पर उन्होंने साथ में यह भी जोडा कि समझौते की मंजिल तक पहुंचने के लिये कठिन प्रयास करने होंगे।
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