विश्व कारोबारी जगत में चार प्रमुख भारतीय चेहरों की कंपनियों के लिए नए साल की शुरुआत अच्छी नहीं रही है। इन भारतीयों, लक्ष्मी मित्तल, विक्रम पंडित, अरुण सरीन तथा इंदिरा नूयी की कंपनियाँ वैश्विक शेयर बाजारों में जारी गिरावट की चपेट में आकर 2008 में अब तक कुल मिलाकर 60 अरब डॉलर से अधिक गँवा चुकी हैं।
इन चारों की अगुवाई वाली कंपनियाँ अपने-अपने क्षेत्र की दिग्गज हैं और यह शेयर बाजारों में उन्हें हुए नुकसान में भी झलकता है। मित्तल की अगुवाई वाली आर्सेलर मित्तल दुनिया की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी है, जबकि पंडित की अगुवाई वाली सिटीग्रुप दुनिया की सबसे बड़ी ऋणदाता फर्म है। इसी तरह सरीन यूरोप की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी वोडाफोन के अगुवा हैं तो नूयी की पेप्सीको दुनिया की दो शीर्ष शीतल पेय कंपनियों में है।
कुल मिलाकर सिटीग्रुप, पेप्सीको, आर्सेलर मित्तल तथा वोडोफोन का बाजार मूल्य घटकर 515.1 अरब डॉलर रह गया है जो 2007 के आखिर में 575.6 अरब डॉलर था।
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