तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) के निदेशक मानव संसाधन ए.के. बालियान ने कहा है कि समुद्र में गहरे पानी से तेल एवं गैस का उत्पादन शुरू करना चुनौतीपूर्ण कार्य है लेकिन ओएनजीसी विश्वस्तरीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप काम करते हुए इस चुनौती में खरा उतरेगा।
बालियान ने कृष्णा गोदावरी बेसिन में ओएनजीसी को मिले गैस भंडार से उत्पादन शुरू करने में कंपनी के कार्यक्रम को सही ठहराते हुए कहा है कि पूरी दुनिया में गहरे पानी से गैस अथवा तेल का उत्पादन शुरू करने में चार से पाँच साल का समय लगता ही है।
उथले पानी में दो से ढाई साल और जमीन पर एक से डेढ साल का समय लग जाता है। ओएनजीसी को आंध्र प्रदेश के केजी बेसिन में गैस का अथाह भंडार मिला है। कंपनी ने कहा है कि इस क्षेत्र से 2011-12 तक ही गैस उत्पादन शुरू हो पाएगा।
डॉ. बालियान ने एक विशेष भेंट में कहा कि केजी बेसिन में ओएनजीसी को जो गैस भंडार मिला है वह 'अल्ट्रा डीप' क्षेत्र में है। इसमें करीब आधा किलोमीटर पानी के नीचे ढाई हजार मीटर तक खुदाई की गई है। पानी के अंदर इतनी गहराई में खुदाई करने का अनुभव दुनिया में बहुत कम लोगों के पास है। इसमें जहाँ से भी संभव होगा सहायता लेनी होगी।
उन्होंने इस काम में कंपनी में अनुभवी इंजीनियरों और अधिकारियों की तंगी से साफ इंकार किया। उन्होंने कहा कि खुदाई उपकरणों और गहरी खुदाई में काम आने वाली मशीनों की कमी हो सकती है लेकिन मानव संसाधनों की कोई तंगी नहीं है।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि निजी क्षेत्र की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को भी केजी बेसिन में गैस भंडार मिला है। कंपनी को 2006 में इसका पता चला और उसने कहा कि वह जुलाई 2008 तक क्षेत्र से उत्पादन शुरू कर देगी। हालाँकि रिलायंस की खोज उथले समुद्री क्षेत्र में है।
इस पर डॉ. बालियान ने कहा कि ओएनजीसी अनुभव और चुनौतीपूर्ण कार्य करने के मामले में किसी से पीछे नहीं है। उन्होंने मुंबई हाई का उदाहरण देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में कंपनी ने मात्र दो साल में ही उत्पादन शुरू कर दिया था जो कि एक रिकॉर्ड है।
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