मकान, कार और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए सस्ता ऋण चाहने वालों की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए रिजर्व बैंक ने मंगलवार को ऋण एवं मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में ब्याज दरों में कोई कमी नहीं की।
बैंक ने मुद्रास्फीति के दबाव को देखते हुये कोई ढिलाई नहीं बरती। उसने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय घटनाक्रमों और विश्व बाजार में कच्चे तेल के मूल्यों पर नजर रखते हुए मूल्य स्थिरता को ही तरजीह दी।
केन्द्रीय बैंक ने इस स्थिति के चलते बैंक दर और रिवर्स रेपो दर को छह प्रतिशत, रेपो दर को 7.75 प्रतिशत, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को 7.50 फीसदी की ऊँची दरों पर स्थिर रखा है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 0.75 फीसदी की कटौती के कारण अटकलें लगाई जा रही थीं कि अर्थव्यवस्था में किसी भी संभावित मंदी को टालने के लिए भारत भी इस पहल का अनुसरण करेगा। लेकिन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने स्पष्ट रूप से यह जाहिर किया था वे मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने को तरजीह देंगे चाहे इसके लिए विकास दर को संतुलित क्यों न करना पड़े।
पिछले दो सालों में यह पहला मौका है जब रिजर्व बैंक ने मुख्य दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। बैंक ने यह संकेत दिया है कि मूल्य और वित्ततीय स्थिरता के मामले में मुद्रा नीति का फल स्पष्ट हो गया है।
हालाँकि बैंक ने सरकार को नीतिगत सलाह दी है कि वह पूँजी प्रवाह को बरकरार रखने के लिए प्रभावशाली स्पष्ट और विश्वस्त प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए उचित एवं निर्णयात्मक नीतिगत पहल करे।
सावधानीपूर्ण रवैया अपनाते हुए विशेष तौर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मुद्रास्फीति की दर बढ़ने की संभावना के मद्देनजर आरबीआई ने बेंचमार्क बैंक दर को छह फीसदी पर ही कायम रखा। यही वह दर जिसके आधार पर केंद्रीय बैंक व्यावसायिक बैंकों को कर्ज देती है।
आरबीआई ने लघु अवधि दरों रेपो दर को 7.5 फीसदी और रिवर्स रेपो को छह फीसदी पर बरकरार रखने का निर्णय किया है। आरबीआई ने ओवरनाईट या अपेक्षाकृत लंबी अवधि के लिए रेपो को पूर्ण रूप से या फिर आंशिक रूप से लचीलापन बरकरार रखा है।
रेपो दर वह दर है जिसके आधार पर रिजर्व बैंक प्रणाली में तरलता पैदा करती है जबकि रिवर्स रेपो अतिरिक्त तरलता को सोखने का एक उपकरण है।
सर्वोच्च बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात को 7.5 फीसदी पर बरकरार रखा है। इस अनुपात के आधार पर बैंक नकद संतुलनों को बरकरार रखते हैं।
रिजर्व बैंक ने वैश्विक वित्तीय घटनाक्रमों को उजागर करते हुए बैंको से विदेशी मुद्रा के मामले में समीक्षा करने को कहा है ताकि उतार-चढ़ाव उनके कार्पोरेट संतुलन-पत्र को प्रभावित न करे।
|