होम लोन और उपभोक्ता सामान ऋण ऊँचे स्तर पर रहेंगे क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी महत्वपूर्ण नीतिगत दरों को मौद्रिक नीति की मंगलवार को पेश समीक्षा में अपरिवर्तित रखा है।
कुछ बैंकरों का मानना है कि रिजर्व बैंक से ऐसा ही करने की उम्मीद थी। नीतिगत दरों और नकद आरक्षित अनुपात में मामूली कटौती की कुछ की उम्मीद पर पानी फिर गया।
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के मुख्य कार्यपालक एच एन सिनोर ने प्रेस ट्रस्ट को बताया कि उम्मीद के मुताबिक आरबीआई ने यथास्थिति रखी है।
बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य अर्थशास्त्री रूपा आर निटस्योर ने कहा कि पूर्व की ही तरह शीर्ष बैंक ने घरेलू कारकों को महत्व दिया है। यथास्थिति रखकर आरबीआई ने संकेत दिया है कि मुद्रास्फीतिकारी गंभीर जोखिम अभी भी हैं।
आईडीबीआई कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी सुशील मुहनोत ने कहा कि ब्याज दरें नरम बनाए जाने की संभावना अल्पकाल में नहीं नजर आती हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि दरों में कटौती का कोई भी कदम अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में उठाया जाएगा।
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