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चिदंबरम ने मौद्रिक नीति को सराहा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में ब्याज दरें बरकरार रखने के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि अभी कुछ तय नहीं है कि भारत और अमेरिका की ब्याज दरों में बढ़ते फासले के कारण पूँजी प्रवाह बढ़ेगा या नहीं।

चिदंबरम ने यह भी कहा कि देश में पूँजी प्रवाह को रोकने के लिए आगे उठाए जाने वाले कदमों के बारे में वह आरबीआई के गवर्नर से बातचीत करेंगे।

उन्होंने कहा कि भारत की अर्थिक विकास दर में कमी के कोई संकेत नहीं हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के कारण भारत और अमेरिका की ब्याज दरों के बीच का फासला निश्चित तौर पर बढ़ा है।

हालाँकि यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की पहल से पूँजी प्रवाह बढ़ेगा। उन्होंने कहा रिजर्व बैंक के गवर्नर जल्द ही दिल्ली आएँगे। हम आरबीआई के साथ इस बात पर विचार करेंगे कि पूंजी प्रवाह पर नियंत्रण रखने के लिए कैसे कदम उठाए जाएँ।

चिदंबरम ने कहा मैं आरबीआई के रवैये का समर्थन करता हूँ। गवर्नर ने मूल्य स्थिरता पर फिर से जोर दिया ऋण की गुणवत्ता और विशेष तौर पर रोजगार केंद्रित क्षेत्रों में ऋण आपूर्ति पर बल दिया है।
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