केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार को कहा कि विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं में चल रही मंदी से भारत के प्रभावित होने की संभावना नहीं है लेकिन उसे उच्चस्तरीय पूँजी प्रवाह का सामना करना पड़ सकता है।
चिदंबरम ने यहाँ के एक इटालियन अखबार के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था निवेश और घरेलू माँग से संचालित हो रही है। हालाँकि हमें अपना निर्यात बनाए रखने के लिए कुछ उपाय करने होंगे। उन्होंने कहा कि मंदी का संकट भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित नहीं करेगा।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मंदी से निवेशकों और नीति निर्माताओं में चिंता बढ़ा दी है और माना जा रहा है कि यह शीघ्र ही यूरोपीय संघ के 15 देशों में फैल जाएगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि जब तक यह मंदी एक बाजार से दूसरे बाजार तक नहीं जाती तब तक चिंता की बात नहीं है लेकिन यदि ऐसा हुआ तो परेशानी होगी लेकिन मैं मानता हूँ कि समय रहते संकट टल जाएगा। चिंदबरम के मुताबिक भारत के लिए इस मंदी से केवल एक खतरा है कि उसका निर्यात प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि यदि डॉलर में गिरावट होती है और रुपया मजबूत होता है तो भारतीय निर्यात से कम मुनाफा होगा। ऐसे में हो सकता है कि पूँजी प्रवाह बढ़ जाए और मुद्रास्फीति नियंत्रण में रखने के लिए हमें मशक्कत करनी पड़े। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका में उपभोग कम होगा तो भारतीय निर्यात भी कम होगा।
इससे पहले योजना आयोग ने कहा था कि यदि वैश्विक मंदी जारी रही तो भारत की आर्थिक विकास दर में आधा प्रतिशत की कमी आ सकती है। इसके अलावा सरकार ने वर्ष 2007-08 में आर्थिक विकास दर 8.9 प्रतिशत रहने की भविष्यवाणी की है।
चीन के बाद देश की अर्थव्यवस्था विश्व में सबसे तेज गति से विकास कर रही है। देश में पिछले चार वर्ष में आर्थिक विकास की औसत दर 8.5 प्रतिशत रही है। चिंदबरम के अनुसार देश में 8 या 9 प्रतिशत की दर से विकास दर बढ़ रही है और शीघ्र ही देश चीन के बराबर पहुँच जाएगा।
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