अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी के मद्देनजर रिजर्व बैंक द्वारा तीसरी तिमाही की ऋण एवं मौद्रिक नीति की कल होने वाली समीक्षा के सम्बन्ध में विश्लेषक अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं।
कुछ का मानना है कि बैंक ब्याज दर में चौथाई से आधा प्रतिशत तक की कटौती कर सकता है जबकि कुछ अन्य का कहना है कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। यदि बैंक ब्याज दरों में कटौती की घोषणा करता है तो पिछले चार वर्षो में यह पहली बार कटौती होगी।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आई मंदी से उबरने के लिए वहाँ के फेडरल रिजर्व बैंकं द्वारा ब्याज दरों में 0.75 प्रतिशत तक की कटौती किए जाने के मद्देनजर रिजर्व बैंक द्वारा कल की जाने वाली नीति की समीक्षा के बारे में कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ब्याज दरों में कटौती से स्थानीय बाजार में तरलता पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी जबकि कुछ अन्य का अनुमान है कि बैक की मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं होने वाला है।
मुंबई शेयर बाजार और निफ्टी में पिछले हफ्ते हुई उठापटक के बाद निवेशकों की निगाहें भी रिजर्व बैंक की ओर लगी हुई हैं। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अमेरिका में ब्याज दर की अचानक हुई ब्याज दर में कटौती से निपटने के लिए भारत उपयुक्त कदम उठाएगा। अमेरिका में ब्याज दर भारतीय रिजर्व बैंक के 7.75 प्रतिशत रेपो दर के मुकाबले 3.5 प्रतिशत पर आ गई है।
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