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रिलायंस पॉवर के प्रस्ताव पर कई सवाल
रिलायंस पॉवर
ऐसे समय जब पूँजी की आवश्यता स्टॉक मार्केट में महसूस की जा रही है, रिलायंस पॉवर ने संस्थागत निवेशकों को सेकेंडरी बाजार के लिए 10 अरब डॉलर (करीब 40 अरब रु.) मुहैया कराने का प्रस्ताव किया है।

सूत्रों के अनुसार कंपनी ने इस संबंध में एक पत्र सेबी को लिखा है। इसमें सेबी से इजाजत माँगी गई है कि वह रिलायंस पॉवर के आईपीओ में शेयरों का अलॉटमेंट क्वालिफाइड इंस्टिट्यूशनल बायर (क्यूआईबी) को जल्द करने दे। यदि सेबी इजाजत दे देती है तो इस कदम से क्यूआईबी के पास 40 हजार करोड़ रु. से अधिक राशि आ जाएगी। रिलायंस पॉवर के इस प्रस्ताव ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

बहरहाल सेबी के सूत्रों का कहना है कि कंपनी के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जाएगी, क्योंकि यह रिटेल निवेशकों के खिलाफ है। सेबी सूत्रों ने कहा कि केवल क्यूआईबी को ही पहले अलॉटमेंट करके बाजार में रिकवरी करने का मौका दिया जाए। आईपीओ में क्यूआईबी का हिस्सा 83 प्रश सब्सक्राइब हुआ है।

कुल 508486 करोड़ बोलिया इस खंड से आई है। जैसा की संस्थागत निवेशकों को 10 प्रश राशि का अपफ्रंट के रूप में भुगतान करना होता है। क्यूआईबी हिस्से के 6156 करोड़ रु.में से 50848 करोड़ रु. पहले ही एकत्रित हो चुके हैं। अधिशेष आवेदन राशि (जो रिफंड होना है) करीब 40 हजार करोड़ रु. या 10 अरब डॉलर है।

सूत्रों का कहना है कि सेकेंडरी मार्केट में हाल में आई तीव्र गिरावट ने निवेशकों को खरीदी को बेहतर मौका दिया था। यदि पूरी रिफंड प्रक्रिया तेजी से संपन्न हो जाती है तो इससे सेकेंडरी मार्केट को बहुत फायदा होगा। कंपनी द्वारा सेबी को पत्र लिखने का मकसद भी यही है। दूसरी ओर कंपनी के अधिकारियों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

कंपनी के पत्र में महत्वपूर्ण बात यह है कि उसमें केवल संस्थागत बोलीकर्ताओं को ही अलॉटमेंट करने का प्रस्ताव किया गया है। इसका अर्थ यह लगाया जा रहा है कि रिटेल इंवेस्टर और एचएनआई को संस्थागत निवेशकों के बाद अलॉटमेंट होगा। सेबी के दिशा-निर्देशों के अनुसार इक्विटी शेयरों का आवंटन आईपीओ के बंद होने के अधिकतम 15 दिन के भीतर अलॉटमेंट करना होता है।
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