स्थानीय थोक जिंस बाजार में बीते सप्ताह ढ़ीले कारोबार के बीच आवक कम रहने से चने में 50 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी देखी गई। चीनी में मामूली नरमी रही। गेहूँ स्थिर और खाद्य तेलों में मिलाजुला रुख रहा।
तेल-तिलहन बाजार में ऐसी अटकलें जोरों पर हैं कि सरकारी एजेंसियों को सरकार खाद्य तेलों को काबू में रखने के लिए अपना स्टॉक बेचने के लिए कह सकती है, जिससे कि यहाँ खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाया जा सके।
सरकार ने पिछले सप्ताह तीन सरकारी कंपनियों और एक सहकारी संस्था को खाद्य तेलों का आयात करने के लिए कहा था। सरकार ने दाम काबू में रखने के लिए पिछले दिनों सीमा शुल्क में कमी की थी, लेकिन इसका खास फायदा नहीं मिल सका।
साल्वेंट एक्स ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता का कहना है कि अगस्त के दौरान पाँच लाख टन से अधिक पाम और सोया तेल आयात की संभावना है। खरीफ के दौरान सोयाबीन का रकबा 71 लाख 50 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 84 लाख हेक्टेयर होने की खबरें हैं। इससे उत्पादन बढ़ने की संभावना है।
बीते सप्ताह स्थानीय मंडियों में मिला-जुला रुख नजर आया। बिनौला तेल 4900 रुपए पर 50 रुपए मजबूत रहा। आवक कम रहने से मूँगफली 200 रुपए ऊँचा होकर 7700 रुपए प्रति क्विंटल हो गय।
सोयाबीन डीगम में 4840 रुपए पर 10 रुपए की हल्की नरमी रही। सरसों तेल 5000 रुपए प्रति क्विंटल पर 10 रुपए नरम रहा। चावल छिल्का और पाम तेल के भाव पिछले सप्ताह के स्तर पर टिके रहे।
अनाज बाजार सूत्रों का कहना है कि उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में कावड़ियों के जुलूस से गेहूँ और चीनी की आवक पर असर पड़ा है। ढीले कारोबार के बीच गेहूँ के भाव पिछले सप्ताह के 1015-1020 रुपए पर टिके रहे। मैदा-सूजी और आटे के भावों में भी कोई बदलाव नहीं नजर आया।
बिहार में भारी बाढ़ को देखते हुए मक्का का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से इसके भाव मजबूत बताए गए। चावल भी मजबूत है। साठी और परमल की नई आवक बनी हुई है, किंतु पुराने बारीक चावल का स्टॉक कम होने से कीमतों पर असर है।
दाल-दलहन सरकारी जानकारी के अनुसार इस मौसम में अब तक दो लाख 43 हजार टन दालों का आयात हो चुका है। खरीफ में दालों की बुवाई अच्छी बताई गई है।
कर्नाटक से नई मूँग की आवक थोड़ी बहुत होने लगी है और इस माह के अंत तक महाराष्ट्र से भी नई मूँग की आवक शुरू हो जाने की संभावना जताई जा रही है।
|