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चना और गेहूँ तेज, चीनी में नरमी
स्थानीय थोक जिंस बाजारों में बीते सप्ताह खाद्य तेल, गेहूँ और चना में जोरदार तेजी आई। चीनी में नरमी का रुख रहा।

तेल, तिलहन, खाद्य तेलों में उबाल रहा। मलेशिया में पामोलीन महँगा बताया गया तो शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड में सोयाबीन। अमेर‍िका में सोयाबीन उत्पादन के जो वैश्विक आँकडे़ दिए गए हैं उसमें उपज में खासी गिरावट बताई जा रही है। अमेर‍िका में इस वर्ष सोयाबीन की बजाय मक्का की खेती अधिक क्षेत्रफल पर हुई है।

कारोबारियों का कहना है कि देश में सोयाबीन, बिनौला और मूँगफली की बुवाई का सीजन है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में पिछले दिनों हुई भारी वर्षा से सोयाबीन की बुवाई पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति में सुधार हुआ।

अगले माह के अंत से त्यौहारों का सीजन शुरू हो जाएगा और इस दौरान माँग जोरदार रहेगी, इसलिए खाद्य तेलों की कीमतों में उतार की संभावनाएँ क्षीण नजर आ रही हैं।

आचार का सीजन होने से सरसों तेल की माँग जोरदार रही। सप्ताह के दौरान यह ऊँचे में 5150 रुपए पर बिकने के बाद आखिर में 5130 रुपए पर 110 रुपए प्रति क्विंटल ऊँचा रहा। कंडीशन वाली सरसों के भाव भी स्थानीय मंडियों में 2250 रुपए प्रति क्विंटल बोले गए।

मूँगफली तेल 7800 रुपए पर बिकने के बाद 7700 रुपए पर 200 रुपए और सोयाबीन डीगम में 4900 रुपए पर 100 रुपए की तेजी आई। तिल और पाम ऑयल 50 से 100 रुपए बढ़कर 5000 रुपए प्रति क्विंटल पर बंद हुए। चावल छिल्का 4500 रुपए पर टिका रहा। बिनौला में 5050 रुपए पर 50 रुपए की तेजी आई।

खाद्य तेलों में तेजी को देखते हुए अखाद्य वर्ग में मजबूती का रुख था। महुआ तेल नया माल आने के बावजूद 200 रुपए बढ़कर 4400 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुँच गया। साबुन वालों की माँग अच्छी बताई गई। नीम और चावल छिल्का भी ऊँचे रहे।

अनाज, गेहूं में जोरदार तेजी रही। इस वर्ष मार्च में नई फसल आने के बाद गेहूँ ने बीते सप्ताह पहली बार 1000 रुपए के स्तर को पार किया। बाजार सूत्रों के इसके पीछे अपने-अपने तर्क हैं। कुछ का कहना है कि आयातित होने वाले गेहूँ के ऊँचे दामों को देखते हुए स्टाकिस्टों ने पकड़ मजबूत बनाई है तो कई दक्षिण भारत की माँग से कीमतों में उछाल बता रहे हैं, लेकिन जो स्थिति अब बन रही हैं उससे गेहूँ के इस बार फिर रिकॉर्ड बनाने की आशंकाएँ जोर पकड़ रही हैं।

मिल क्वालिटी दडा गेहूँ 60 रुपए तक बढ़कर 1050-1060 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुँच गया। आटा, मैदा और रवा, सूजी में भी 30 से 55 रुपए प्रति बोरी की तेजी आई।

उत्तरप्रदेश का नया साठी चावल शुरू होने के समाचार थे, किंतु इसके भाव पिछले साल की तुलना में ऊँचे बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि चावल में स्टॉक छोटे कारोबारियों के पास न होकर बडे़-बडे़ स्टॉकिस्टों के कब्जे में है और वह मनमाने ढंग से दामों को बढा़ने में लगी हुई हैं। अच्छे किस्म के चावल का बाजार में अभाव बना रहने से इसके दामों में 200-250 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आई।

गुड़, चीनी वर्तमान तेजी के माहौल में कुछ नरम है तो वह है चीनी। मिलों की बिकवाली का दबाव है। हालाँकि वायदा बाजारों में भाव सप्ताह के दौरान कुछ मजबूत रहे, किंतु इसका असर हाजिर दामों पर देखने को नहीं मिला।

मिल डिलीवरी चीनी 1280-1360 रुपए पर 20-30 रुपए प्रति क्विंटल नीचे आई। हाजिर में बडी़ खरीदारी नहीं निकल रही है। मंदे की उम्मीद में जरूरत के मुताबिक माल उठाया जा रहा है। हाजिर में एम और एस-30 में भाव 1415-1510 रुपए पर 10-15 रुपए प्रति क्विंटल नीचे आए।

दाल, दलहन, चना पूरे सप्ताह वायदा बाजार की चाल पर गिरता बढ़ता रहा। हालाँकि आमद निरंतर ठीक रही, किंतु बेसन और दाल मिलों की माँग भी थी। सप्ताह के दौरान ऊँचे में चना 2375-2400 रुपए प्रति क्विंटल बिकने के बाद सप्ताहांत 2330-2365 रुपए पर 25-30 रुपए प्रति क्विंटल ऊँचा रहा। मसूर और अरहर में पहले के भावों पर मजबूत थी, किंतु उड़द और अरहर में नरमी आई।
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