आवक कम रहने से स्थानीय थोक जिंस बाजार में बीते सप्ताह खाद्य तेलों की कीमतों में उबाल रहा और सरसों तेल तो 190 रुपए प्रति क्विंटल ऊँचा हो गया। गेहूँ और चने में भी तेजी का रुख रहा। चीनी में नरमी का रुझान रहा।
अनाज सरकार को इस मौसम में गेहूँ खरीद में अच्छी सफलता मिली है। सरकारी एजेंसियाँ अब तक 1.8 करोड़ टन गेहूँ खरीद चुकी हैं। सरकार के पास लगभग 45 लाख टन पिछले साल का स्टॉक है।
पंजाब और हरियाणा में 15 जून को गेहूँ खरीद का मौसम समाप्त हो जाने के बाद स्थानीय आढ़तियों ने खरीदारी शुरू कर दी है। विश्लेषकों का कहना है कि दाम कुछ ऊँचे होने के बाद किसानों ने अब अपना रोका हुआ माल बाजार में लाना शुरू कर दिया है।
मंडियों में गेहूँ की आवक में थोड़ी कमी आई है। इससे गेहूँ के भाव 960-965 रुपए प्रति क्विंटल पर 10 से 15 रुपए ऊँचे हो गए। इस तेजी का असर आटे और मैदे पर भी दिखाई दे रहा है।
बीते सप्ताह आटे के भाव 960-065 रुपए पर 10 से 15 रुपए ऊँचे हो गए। मैदे में 1080-1090 रुपए पर 50 से 60 रुपए की भारी तेजी रही। रवा, सूजी भी 25 से 40 रुपए ऊँची बताई गई।
तेल, तिलहन बीते सप्ताह खाद्य तेलों में मजबूती का रुख रहा। हालाँकि मलेशिया में निर्यात कम होने की आशंकाओं और आपूर्ति बढ़ने से पाम तेलों में नरमी के समाचार हैं। मलेशिया के समाचारों से इंडोनेशिया में सोया तेल भी ढीला बताया गया है। बावजूद इसके स्थानीय स्तर पर खाद्य तेल मजबूत रहे।
देश में इस वर्ष तिलहनों की पैदावार पहले ही कम हुई है, जिससे विदेशी भावों का दबाव निरंतर बने रहने की उम्मीद है। आवक कम रहन और आगे के अचार सीजन को देखते हुए खाद्य तेलों में मजबूती बनी है। सरकार ने पाम तेल पर आयात शुल्क में कटौती पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
आवक कम रहने से बिनौला तेल 480 रुपए पर 50 रुपए प्रति क्विंटल मजबूत रहा। दिसावरी मंडियों में तेजी के समाचारों से मूँगफली तेल 7100 रुपए पर 50 रुपए ऊँचा हो गया। आपूर्ति कम रहने से सरसों तेल में 5050 रुपए पर 190 रुपए महँगा हो गया।
चावल छिलका भी 4350 रुपए पर 50 रुपए प्रति क्विंटल तेज हो गया। तिल में 4850 रुपए पर 50 रुपए की नरमी रही। कम आवक से पाम तेल के भाव 4500 रुपए प्रति क्विंटल पर 50 रुपए ऊँचे हो गए। सोयाबीन डिगम के भाव 4750 रुपए पर इतने ही बढ़ गए।
गुड़, चीनी सरकार ने बीते सप्ताह चीनी का बफर स्टॉक 20 लाख टन से बढ़ाकर 50 लाख टन कर दिया है। सरकार के इस कदम से चीनी उद्योग को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। चीनी उद्योग को एक अर्से से इस फैसले का इंतजार था।
हालाँकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इस वर्ष चीनी का उत्पादन 2.8 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जबकि घरेलू खपत महज 1.93 करोड़ टन है। पिछले साल के 45 लाख टन स्टॉक को देखते हुए यह कदम नाकाफी है।
बफर स्टॉक बढ़ाने के फैसले का असर चीनी की हाजिर कीमतों पर नहीं दिखाई दिया। बाजार में स्टॉक काफी है। बीते सप्ताह एस30 गुणवत्ता की चीनी में 1375-1420 रुपए प्रति क्विंटल पर 10 से 25 रुपए प्रति क्विंटल तक की नरमी रही। मिल डिलीवरी चीनी1280-1350 रुपए पर पाँच रुपए की गिरावट रही।
दाल, दलहन सरकारी एजेंसियों ने छह लाख 725 हजार टन दाल का आयात करने का अनुबंध किया था जिसमें से एक लाख 86 हजार टन दालें 20 जून तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुँच चुकी हैं। आयातित दालों में उड़द, मूँग, मसूर, चना, पीली मटर, तुर आदि शामिल हैं।
राजस्थान से बांसवाड़ा लाइन से चने की आवक कम रहने और बेसन मिलों की ओर से माँग सुधरने से कोई खास नहीं रहने से चने के दाम 2200-2220 रुपए पर 25 रुपए प्रति क्विंटल ऊँचे हो गए। अन्य दाल-दलहन सामान्य माँग के चलते पहले के स्तर पर चले गए।
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