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सर्दी से फसलें ठिठुरती नहीं, जल जाती हैं
धुआँ करना
बिना सिंचाई वाले क्षेत्रों में पाले से बचाव के लिए खेतों की मेढ़ों के ऊपर घास, खरपतवार, गोबर (सूखा), कंडे, कूड़ा-करकट आदि इकट्ठा करके रख लेते हैं। पाला पड़ने की आशंका पर उसमें आग लगाकर धुआँ कर दें। इससे वातावरण व फसल के बीच धुएँ की परत बन जाती है। इससे फसल का बचाव हो जाता है।

रसायनों का छिड़काव
प्रयोगों में पाया गया है कि चने की फसल पर 600 मिली सायकोसिल प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़कें। आलू की फसल पर 0.1 प्रतिशत गंधकाम्ल के छिड़काव से अनुपचारित फसल से 18 क्विंटल उपज अधिक मिली। इनका उपयोग विशेषज्ञों की देखरेख में ही करें अन्यथा हानि हो सकती है।

छप्पर का उपयोग
नर्सरी में तैयार किए जा रहे रोपों के ऊपर बाँस की चटाई का छप्पर छाने से भी पाले का असर कम होता है।

पाले से बचाव के उपाय
हर साल पाला पड़ने वाले क्षेत्रों के किसान पहले से ही पाला सहन करने वाली फसलें जैसे गेहूँ, जौ, चुकंदर, मूली, गाजर शलजम, पालक, सलाद पत्ती आदि फसलें ही उगाते हैं। पाला यदि हर साल एक ही समय पर पड़ता है तो फसलों के बोने के समय सामान्य समय से कुछ जल्दी या देर से किया जा सकता है। सामान्यतः फसलों पर पाले का असर उसकी प्रारंभिक अवस्था या फूल आने की अवस्था में अधिक होता है। पाला आने के समय तक फसल पक चुकी हो तो नुकसान से बच जाती है।
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