28 साल पहले इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों के मामलों में राजधानी की कई अदालतों ने लगभग 45 लोगों को दोषी ठहराया है। पुलिस ने यह जानकारी दी।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि अलग-अलग अदालतों ने 442 लोगों को अभियुक्त ठहराया है, जबकि एक मामला अदालत में लंबित है। इन 442 दोषियों में से 49 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है और तीन को दस साल से ज्यादा के कैद की सजा मिली है। साथ ही 6 पुलिस अधिकारियों को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान कामकाज से संबंधित खामियों के लिए दंडित किया गया है।
31 अक्टूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली और देश के कई दूसरों हिस्सों में भयानक सिख विरोधी दंगे हुए थे। सरकार ने अप्रैल 1985 में दंगों की जांच और इस तरह की घटनाएं दोबारा न हो, इसके लिए उपायों की अनुशंसा करने के लिए न्यायाधीश रंगनाथ मिश्रा आयोग का गठन किया था।
बाद में दिल्ली सरकार ने भी दंगों की जांच के लिए कपूर-मित्तल समिति, जैन-अग्रवाल समिति और आरके अहूजा समिति का गठन किया था। सीबीआई को कुछ नेताओं के खिलाफ मामलों में जांच का कार्यभार सौंपा गया था। सीबीआई ने नेताओं के खिलाफ सात मामलों में पुनर्जांच पूरी कर ली।
अधिकारी ने कहा, इन सात मामलों में से दो मामलों में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट अदालत ने स्वीकार कर ली और बाकी पांच में मुकदमा चल रहा है। सरकार द्वारा दंगों की जांच के लिए गठित न्यायाधीश जीटी वाहनवती आयोग ने भी कुछ वरिष्ठ राजनेताओं पर आरोप लगाए थे। (भाषा)