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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल रामलीला मैदान में मध्य रात्रि के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के लिए बाबा रामदेव और दिल्ली पुलिस दोनों को जिम्मेदार ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवालोकतंत्हमलबतातहुकहि इस हिंसक घटना को टाला सकता था।

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल रामलीला मैदान में आधी रात को हुई हिंसक घटना के लिए दिल्ली पुलिस और योग गुरु रामदेव को फटकार लगाते हुए आज कहा कि यह जनता और सरकार के बीच ‘विश्वास में कमी का स्पष्ट उदाहरण’ है।

न्यायमूर्ति बीएस चौहान और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की एक पीठ ने कहा कि इस घटना से राज्य की शक्ति जाहिर होती है, जिसने लोकतंत्र की नींव पर प्रहार किया। पीठ ने इससे आगे कहा कि पुलिस और राज्य इस घटना को टाल सकती थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए थे।

पीठ ने कहा कि सत्ता में मौजूद लोग और शासित लोगों के बीच विश्वास की कमी का यह सुस्पष्ट उदाहरण है। न्यायालय ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई शांति कायम करने लिए है, लेकिन उसने खुद ही शांति व्यवस्था में खलल डाला।

लाठीचार्ज के मामले में ‍सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मैदान पर हुई पुलिस कार्रवाई लोकतंत्र पर हमला था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई और उसे जिम्मादार माना है। कोर्ट ने यह भी माना कि रात में कार्यकर्ताओं से रामलीला मैदान खाली कराना भी गलत था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चले।

सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव को भी फटकार लगाई और कहा कि जब 144 धारा लगाई गई थी तो क्यों भीड़ जमा की गई। भीड़ को हटने के लिए कहना चाहिए था। कोर्ट ने रामदेव पर भीड़ को काबू न रख पाने का इल्जाम लगाया।

सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव को भी दोषी मानते हुए कहा है कि उन्हें उस समय दिल्ली पुलिस का कहना मान लेना चाहिए था, अगर कुछ गलत था तो बाद में इसका फैसला कोर्ट करता।

इस मामले में रामदेव ने कहा कि मैंने शांति की अपील की थी। रामदेव ने यह ‍भी कहा कि मुझसे पुलिस वालों ने कहा कि हम इस कार्रवाई के लिए मजबूर थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घायलों को रावदेव का ट्रस्ट 25 प्रतिशत मुआवजा दे। पुलिसिया कार्रवाई के दौरान घायल होकर दम तोड़ने वाले राजबाला के परिवार वालों को पांच लाख रुपए मुआवजा दिए जाने के भी निर्देश दिए। अदालत ने यह भी तय किया कि मुआवजे की राशि का 25 फीसदी रामदेव की ओर से और 75 फीसदी दिल्‍ली पुलिस की ओर से दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई गलत है। आधी रात को इतनी हड़बड़ी में मैदान खाली कराने की क्या जरूरत पड़ गई थी।

गौरतलब है कि नई दिल्ली के रामलीला मैदान पर 4 जून को बाबा रामदेव के आंदोलनकर्मियों पर मध्य रात्रि के दौरान दिल्ली पुलिस ने बर्बरता पूर्वक कार्रवाई की थी जिसके चलते कई लोग घायल और राजबाला नाम की एक महिला की मौत हो गई थी। (वेबदुनिया)
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