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देश में खेती के लिए बड़े सहारे का काम करने वाला दक्षिण पश्चिमी मानसून इस बार आज पूरे देश में पहुंच गया। इसके बावजूद इस मौसम में अभी बारिश की मात्रा सामान्य से 23 प्रतिशत कम है।

मानसून पांच जून को केरल तट से प्रवेश किया था लेकिन इसकी प्रगति धीमी रही। इसके कारण धान, दलहन तथा मोटे अनाज की बुआई में कुछ देरी हुई है।

भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक एलएस राठौड़ ने कहा कि बारिश की स्थिति सुधरी है लेकिन अभी भी यह 23 प्रतिशत कम है। मानसून आज पूरे देश में छा गया। गुजरात तथा महाराष्ट्र में भारी बारिश हुई।

मानसूनी बारिश में सुधार से धान, सोयाबीन तथा मूंगफली की खेती में तेजी आएगी। हालांकि उन्होंने कहा कि कर्नाटक तथा महाराष्ट्र में कम बारिश से मोटे अनाज की खेती प्रभावित हो सकती है।

मानसून की प्रगति पर चर्चा के लिये कृषि मंत्री शरद पवार तथा खाद्य मंत्री के वी थॉमस के साथ बैठक के बाद राठौड़ संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।

राठौड़ ने कहा कि अब हिमालयी, तराई तथा पूर्वी क्षेत्र में बारिश का जोर बढ़ेगा। वर्षा अभी 23 प्रतिशत कम है। यह कमी अगले सप्ताह तक बनी रह सकती है।
उन्होंने कहा कि अबतक कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात के कुछ भागों तथा मध्य प्रदेश के मध्य भागों में हल्की वर्षा हुई है।

पिछले साल मानसून बेहतर रहने से 2011-12 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) में खाद्यान उत्पादन 25.26 करोड़ टन रहा।

कृषि के लिहाज से मानसून की खासी अहमियत है क्योंकि देश में अभी भी 40 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र सिंचाई के अंतर्गत है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान करीब 15 प्रतिशत है। (भाषा)
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