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मुख पृष्ठ » खबर-संसार » समाचार » राष्ट्रीय » आय के आधार पर ही कर सकेंगे शादी में खर्च
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आप विवाह समारोह में प्रीतिभोज, घर की सजावट, स्वागत-सत्कार और दूल्हा-दुल्हन के साज-सामान पर कितना खर्च करें, यह आपकी आय पर निर्भर करेगा। सरकार की एक उच्चाधिकार समिति ने सिफारिश की है कि शादी में होने वाले खर्च को आय से जोड़ा जाए। इस खर्च में दहेज, उपहार आदि शामिल रहेगा।

महिला सशक्तीकरण से संबंधित योजना आयोग के कार्यकारी समूह की सिफारिशों को दहेज रोकथाम कानून के प्रावधानों को मजबूत करने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है। यह कानून लागू हुए 28 साल बीत चुके हैं, लेकिन देश में अभी भी दहेज प्रताड़ना की घटनाएं होती रहती हैं।

महिला व बाल विकास मंत्रालय में सचिव की अध्यक्षता में गठित समूह ने कहा कि शादी में होने वाले खर्च की सीमा को प्रीतिभोज में परोसे जाने वाले भोजन पर भी लागू किया जा सकता है। हालांकि समूह ने यह भी कहा कि विवाह खर्च की सीमा को संबंधित व्यक्ति की आय से जोड़ा जा सकता है।

कार्यसमूह मौजूदा दहेज विरोधी कानून की जगह नया कानून लाने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रहा है। समूह चाहता है कि दहेज विरोधी कानून को कारगर तरीके से लागू करने के लिए पर्याप्त संख्या में समर्पित, पूर्णकालिक दहेज रोकथाम अफसरों की नियुक्ति की जानी चाहिए। समूह ने दहेज की मौजूदा परिभाषा में बदलाव लाने और दहेज कानून तोड़ने पर जुर्माने पर भी पुनर्विचार की जरूरत जताई है।

पुराने आदेश की आई याद : समूह की सिफारिशें 70 के दशक में लाए गए मेहमान नियंत्रण आदेश की याद दिलाता है। इस आदेश में महत्वपूर्ण पारिवारिक समारोहों में अतिथियों की संख्या पर पाबंदी का प्रावधान था। लेकिन बाद में यह आदेश रद्द कर दिया गया क्योंकि इसे व्यावहारिक नहीं पाया गया।

अब तो माहौल भी बदला : पारिवारिक या विवाह समारोहों में खर्च पर नियंत्रण के प्रयासों को पूर्व में इसलिए भी ठीक माना गया कि उस दौरान मितव्ययिता समाज में प्रचलन में रही थी, लेकिन चुनाव आयोग के कार्यसमूह के नए प्रयास ऐसे वक्त शुरू हुए हैं, जब ऐसे समारोहों में अनाप-शनाप खर्च की कोई आलोचना नहीं होती है। (एजेंसी)
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