पोर्ट सैद में हुए फुटबॉल मैच के दौरान भड़की हिंसा को काबू करने में पुलिस की कथित निष्क्रियता के विरोध में हजारों लोगों ने मिस्र के गृह मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन किया और उनकी सुरक्षा बलों के साथ झड़पें भी हुईं। झड़प में 2 लोगों के मरने और 400 लोगों के घायल होने की खबर है। फुटबॉल मैच के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 74 लोगों की मौत हो गई थी।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यह खेलों के दौरान हुई 'दुर्घटना नहीं, बल्कि सैन्य नरसंहार है' जैसे नारे लगा रहे थे। उन्होंने कल अल अहले क्लब मुख्यालय से तहरीर चौक होते हुए गृह मंत्रालय तक जुलूस भी निकाला।
दंगारोधक पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जिससे लगभग 400 लोग घायल हो गए। इस इलाके में एक अस्थायी अस्पताल का निर्माण किया गया है।
गृह मंत्रालय की ओर जाने वाली इसी सड़क पर नवंबर में प्रदर्शनकारियों और पुलिस बलों के बीच ऐसी ही झड़प हुई थी। इस झड़प में लगभग 40 लोगों की मौत हो गई थी। तब खबरें थीं कि प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए जिस गैस का इस्तेमाल किया गया था वह जहरीली थी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे प्रतिबंधित किया जा चुका है।
अल अहले क्लब मुख्यालय से निकला यह जुलूस आगे जा कर दो हिस्सों में बंट गया। एक भाग गृह मंत्रालय की ओर गया और दूसरा समीपवर्ती पीपल्स असेंबली की इमारत की ओर अग्रसर हुआ।
प्रदर्शनकारी देश में सत्तारूढ़ सैन्य बलों की सर्वोच्च परिषद के खिलाफ नारे लगा रहे थे जिसे वह हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। इन लोगों ने परिषद के फील्ड मार्शल हुसैन तंतावी के खिलाफ मुकदमा चलाने की भी मांग की।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने मंत्रालय की ओर जाने वाले मार्ग पर लगाई गई कांटेदार बाड़ को हटा दिया और सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके। कुछ ने हिंसा रोकने के लिए मानव श्रृंखला बनाई और शांतिपूर्ण रहें के नारे लगाए।
कल की हिंसा में घायल हुए मोहम्मद अब्देल हमीद नामक व्यक्ति ने कहा कि पुलिस ने अहले समर्थकों पर हमला करने वालों के साथ मिल कर षड्यंत्र रखा ताकि फील्ड मार्शल तंतावी की आलोचना करने के लिए फुटबॉल प्रशंसकों को सजा दी जा सके। उसने कहा कि पुलिस ने हमें मरने के लिए छोड़ दिया और खुद कुछ किए बिना तमाशा देखती रही। (एजेंसियां)