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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने कहा है कि उनके द्वारा प्रक्षेपित मार्स रोवर ‘क्यूरियोसिटी’ मंगल की सतह पर बड़ा चक्कर लगाएगा, ताकि वहां की ज्यादा से ज्यादा भौगोलिक जानकारी इकट्ठी की जा सके

मंगल पर मौजूद ‘माउंट शार्प’ नामक पर्वत पर पानी के अवशेष तलाशने के लिए जाने से पहले क्यूरियोसिटी इसकी विपरीत दिशा में एक विशेष जगह तक जाएगा। इस जगह को नासा की जेट प्रणोदक प्रयोगशाला ने ‘ग्लेनेल्ग’ का नाम दिया है।

पसाडेना प्रयोगशाला के एक बयान के अनुसार, ग्लेनेल्ग रोवर के उतरने की जगह से 500 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पर तीन भिन्न प्रकार के भूभाग एक-दूसरे से आकर मिलते हैं। यहां भूभाग पर हल्के रंग की परत देखकर वैज्ञानिकों को लगता है कि यह क्यूरियोसिटी के द्वारा खुदाई के लिए उपयुक्त रहेगी।

छोटे-छोटे पत्थरों का जमाव दर्शा सकता है कि यह सतह काफी पुरानी और सख्त है। जब तक रोवर सतह को खोदता नहीं है तब तक दूसरे बिंदु पर उसी सतह की झलक मिल सकती है जिस पर रोवर उतरा था।

वैज्ञानिकों को लगता है कि इस जगह को ‘ग्लेनेल्ग’ नाम देना बिल्कुल सही है क्योंकि यह एक पेलिंड्रोम है, जिसका अर्थ किसी एक बिंदु के आगे व पीछे दोनों ओर समान रूप से गति करना है। रोवर को भी माउंट शार्प तक पहुंचने के लिए इसी दिशा में वापस लौटना होगा।

मंगल विज्ञान प्रयोगशाला प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक जॉन ग्रोजिंगर ने बताया कि ग्लेनेल्ग की यात्रा रोवर के लिए पहला लंबा सफर होगी। वह कहते हैं कि ग्लेनेल्ग तक पहुंचने में रोवर को तीन से चार सप्ताह लगेंगे। वह वहां पर एक महीने तक रहेगा और फिर माउंट शार्प की ओर चलेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि रिमोट से संचालित इस रोवर को माउंट शार्प की चोटी के आधार तक पहुंचने में लगभग एक साल का समय लग सकता है। यह रोवर के उतरने वाली जगह से 20 किलोमीटर की दूरी पर है।

माउंट शार्प के निचले हिस्से की तस्वीरों में एक से तीन मंजिला इमारतों की ऊंचाई वाली पहाड़ियां, पठार, ढलुआ पठार और घाटियां दिखाई पड़ती हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस हिस्से के निचले भाग में जलीय खनिज पाए जा सकते हैं, जो भूविज्ञान के इतिहास में एक नए क्षेत्र को खोल देंगे।

ढाई अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाला यह अंतरिक्ष यान छह अगस्त को अंतरराष्ट्रीय समायनुसार 10 बजे मंगल की सतह पर पहुंचा था। (भाषा)
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