दुनिया भर के घड़ीसाजों ने 30 जून के अंतिम मिनट में ‘एक लीप सेकंड’ जोड़ा ताकि पृथ्वी की बेतरतीब चाल की भारपाई हो सके।
शनिवार के अंतिम मिनट में 60 की बजाए 61 सेकंड थे क्योंकि हमारी पृथ्वी की गतियों की भरपाई करने के लिए घड़ीसाजों ने एक अतिरिक्त सेकंड इसमें जोड़ा।
हमारा ग्रह 360 डिग्री की परिक्रमा के लिए 86,400 से ज्यादा सेकंड का समय लेता है लेकिन कक्षा में घूमने के दौरान सूर्य, चंद्रमा का गुरूत्वाकर्षण बल और समुद्र की तरंगें अपना प्रभाव डालती हैं और घुर्णन के समय में हल्की रूकावट आती है।
इसका नतीजा यह होता है कि पृथ्वी द्वारा लिए गए समय और अंतरराष्ट्रीय परमाणु समय (टीएआई) में विचलन आ जाता है और इसे दूर करने के लिए कॉर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (यूटीसी) में बदलाव किया जाता है। यह समायोजन 1972 में शुरू हुआ और यह 25वां मौका था जब यूटीसी में ‘लीप सेकंड’ जोड़ा गया। (भाषा)