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भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक की अगुवाई में किए गए अनुसंधान में कहा गया है कि अब लेजर प्रणाली के इस्तेमाल से दीवार के पीछे मौजूद व्यक्ति या वस्तु का पता लगाया जा सकता है। इस प्रणाली से छिपी हुई चीजों का तीन आयामी (3डी) चित्र तैयार कर लिया जाता है।

मैसाचुटेस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से स्नातक छात्र एवं अध्ययन के अगुवा उत्कृष्ट गुप्ता ने बताया, कल्पना करिए फोटोन कणों की, जो किसी चीज से टकराकर वापस आ जाएं। जब ऐसा होगा, हम किसी चीज के चारों ओर घूमने और वापस आने में उन कणों की ओर से लगाए गए समय के आधार पर किसी चीज के आकार की जानकारी हासिल कर सकते हैं।

एमआईटी, हावर्ड विश्वविद्यालय, विस्कोनसिन विश्वविद्यालय और राइस विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने फोटोन की गतिविधि का अध्ययन कर नवीन प्रकाश विज्ञान के सहारे छिपी हुई चीजों को देखने में सफलता पाई है।

गुप्ता ने संभावना जताई कि इस तकनीक के व्यावसायिक इस्तेमाल में कम से कम पांच से 10 साल लग सकते हैं। इस अनुसंधान के परिणाम को ‘ऑप्टिक्स एक्सप्रेस’ नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। (भाषा)
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