इन दिनों फर्जी 'हाई-फाई' सम्मान का बाजार असली और नकली, दोनों तरह के डॉक्टरों के लिए एक गर्म है। अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट इंक नामक यह फर्जी संस्था 'हूज हू' नाम से सम्मान 400 डॉलर में बेच रही है। हूज हू अंग्रेजी का एक मुहावरा है जिसका मतलब होता है चुनिंदा शख्सियतें।
देश में यह फर्जी सम्मान लाखों डॉक्टरों के क्लिनिकों या चैंबर की शोभा बढ़ा रहा है। वे देश का प्रतिष्ठित मेडिकल सम्मान पाने के लिए इसी फर्जी सम्मान का धड़ल्ले से उपयोग भी कर रहे हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई की गिरफ्त में आए कश्मीर अमेरिकन परिषद के निदेशक गुलाम नबी फई की तरह ही इस अमेरिकी संस्था का अध्यक्ष टीएम इवांस भी विदेशों में दवा और स्वास्थ विषयों पर अंतरराष्ट्रीय सिंपोजियम आयोजित करता है। अंतर सिर्फ इतना है कि भारत के बुद्धिजीवी कुख्यात पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पैसे पर अमेरिका जाते थे, लेकिन सैनफ्रैंसिको स्थित 'वर्ल्ड फोरम ऑफ सिम्पोजियम' का 'होस्ट' इवांस सम्मान के पैसे लेने की तरह ही सेमिनार में भाग लेने का मौका देने के एवज में डॉक्टरों से पैसे ऐंठता है।
जाहिर है विदेश में आयोजित सेमिनार में भाग लेने का सम्मान पाने वाले डॉक्टरों को जाने आने का खर्च भी खुद ही भरना प़ड़ता है। दिल्ली मेडिकल काउंसिल के सदस्य एवं झोला छाप डॉक्टरों के खिलाफ अपनी मुहिम के लिए पूरे देश में चर्चित डॉ. अनिल बंसल चाहें तो हूज हू सम्मान के हकदार अभी 400 डॉलर देकर बन सकते हैं। इसके लिए उन्हें इवांस का ई-मेल लगातार आ रहा है।
लेकिन वह इस सम्मान के झांसे में नहीं आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि यही सम्मान भारत में 50,000 से भी अधिक डॉक्टरों की फर्जी डिग्री बेच चुके दिल्ली के 90 वर्षीय वलवंत राय अरोड़ा के पास भी है। वह इसी सम्मान को दिखा कर डॉक्टरी की फर्जी डिग्री बेचने की अपनी दुकानदारी चला रहा है।
कभी इस अमेरिकी सम्मान की तरह ही असली डॉक्टरों के बीच इंग्लैंड का एक सर्टिफिकेट 'एमआरएसएच' भी बहुत लोकप्रिय था। 80 के दशक में डॉक्टरों को यह सर्टिफिकेट 500 से 1000 रुपए में मिल जाता था लेकिन इसके फर्जी होने की बात सामने आने पर इंग्लैंड की संस्था की दुकान बंद हो गई।
बहरहाल, उत्तम नगर स्थित विपिन गार्डन में रह कर डॉक्टरी की नकली डिग्री बांटने वाले वलवंत राय अरोड़ा के मामले की जांच करने वाली दिल्ली पुलिस इस सम्मान की बिक्री के मामले की भी जांच करने वाली है।