शर्मनाक! अरबपति का बाप पाई-पाई के लिए मोहताज...

मुंबई| पुनः संशोधित बुधवार, 9 अगस्त 2017 (21:11 IST)

(Photo Courtesy: Twitter) मुंबई। छोटे शहरों में माता-पिता को बेघर करके बेटों द्वारा सम्पत्ति पर कब्जा करने की घटनाएं आए दिन सुनने को मिलती हैं लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि देश के नामी घराने में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें अरबपति बेटे ने अपने पिता को पाई-पाई के लिए मोहताज कर दिया हो? दर-दर की ठोकरें खाने वाले और कोई नहीं, बल्कि लिमिटेड के मालिक विजयपत सिंघानिया हैं, जिन्होंने अपना हक हासिल करने के लिए अब अदालत का दरवाजा खटखटाया है...
देशभर में रैमंड शूटिंग एक जाना माना ब्रांड है और विजयपत सिंघानिया ने अथक मेहनत करके इस
एम्पायर को खड़ा किया था, लेकिन वे नहीं जानते थे कि उन्हीं का बेटा उनकी जिंदगी में एक दिन
ऐसा भी लाएगा, जब वे पैसे-पैसे के लिए मोहताज हो जाएंगे..विजयपत का आरोप है कि उनके
अरबपति बेटे गौतम सिंघानिया ने को ‍अपनी जागीर बना लिया है।
विजयपत अब सिंघानिया हाउस में रहने के बजाए मुंबई के ग्रैंड पराडी नामक सोसायटी में एक किराए
के फ्लैट में रहने को मजबूर हैं। उनकी यह दयनीय हालत बेटे गौतम ने की है, जो आलीशान कारों में
घूमते हैं और यॉट तक रखने की हैसियत रखते हैं। पारिवारिक विवाद की वजह से विजयपत 'फर्श' से
'अर्श' तक पहुंचे और आज फिर से जमीन पर आ गिरे हैं...

पिता विजयपत सिंघानिया और बेटे गौतम का विवाद मीडिया की सुर्खियों में इसलिए बना हुआ है क्योंकि विजयपत ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपना हक मांगा है। उन्होंने अपनी याचिका
में मुंबई के सबसे पॉश इलाके मालाबार हिल्स स्थित अपने डुप्लेक्स घर का पजेशन मांगा है ताकि वे
अपनी शेष जिंदगी के पल सुकून से बिता सकें...

विजयपत के वकील ने बताया कि सिंघानिया ने रैमंड कंपनी के अपने सारे शेयर अपने बेटे गौतम के
हिस्से में दे दिए, जिनकी कीमत 1000 करोड़ रुपए है। जिस बेटे के लिए पिता ने इतनी दरियादिली दिखाई, उसी बेटे ने उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर दिया है। वकील ने कहा कि मजबूर
होकर विजयपत को अपना मकान छोड़कर किराए के घर में रहना पड़ रहा है। यही नहीं, विजयपत की
गाड़ी और ड्राइवर तक उनसे छीन लिए गए हैं।

शायद 'कलयुग' इसी को कहते हैं, जहां बूढ़े हो चुके पिता को जवान बच्चे दूध में मक्‍खी की तरह
अपनी जिंदगी से निकाल बाहर फेंकते हैं। ये वही बच्चे होते हैं, जिन्हें पिता अंगुली पकड़कर चलना सिखाता है और कंधों पर उठाकर मेले-ठेले दिखाता है। लेकिन उम्र के अंतिम पड़ाव पर जब बूढ़ी आंखों
को अपनत्व की सबसे ज्यादा तलाश रहती है और वहां उन्हें सूनापन नजर आता है तो वे उस दिन
को कोसते हैं, जब उन्होंने औलाद के लिए ऊपरवाले से दुआ की थी...

कंकाल बन गई मां :
अपने परिजनों के प्रति आज की युवा पीढ़ी कितनी संवेदनहीन हैं, इसका ताजा उदाहरण मुंबई में हुई एक घटना में सामने आया, जहां एक बेटा एक साल बाद जब अमेरिका से स्वदेश लौटा तो उसे फ्लैट मां का कंकाल मिला। खबरों में सामने आया कि अमेरिका में रहने वाले बेटे ने एक साल तक अपनी मां से बात नहीं की थी। समझा जाता था कि गरीब और मध्यम वर्ग के बुजुर्गों के साथ ही ऐसी घटनाएं होती हैं, लेकिन मुंबई वाली घटना में महिला के पास करोड़ों के फ्लैट थे, लेकिन उसके पास मौजूद रुपया भी उसके अकेलेपन को दूर नहीं कर सका।

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