कोहिनूर पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, जानिए...

नई दिल्ली| पुनः संशोधित शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017 (15:44 IST)
नई दिल्ली। ने शुक्रवार को कहा कि वह ब्रिटेन से के लिए फिर से दावा करने हेतु या फिर इसकी नीलामी को रोकने के लिए कोई आदेश नहीं दे सकता है।
प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कीमती हीरा वापस लाने के लिए दायर याचिका का निबटारा करते हुए कहा कि वह विदेशी सरकार से एक संपत्ति को नीलाम नहीं करने के लिए नहीं कह सकती है। न्यायालय ने कहा कि वह किसी ऐसी संपत्ति के बारे में आदेश पारित नहीं कर सकता तो दूसरे देश में है।

पीठ ने कहा, 'हम आश्चर्यचकित हैं कि ऐसी याचिकाएं उन संपत्तियों के लिए दायर की गई हैं जो अमेरिका और ब्रिटेन में हैं। किस तरह की यह रिट याचिका है।'
शीर्ष अदालत ने केन्द्र द्वारा दाखिल हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सरकार इस मसले पर ब्रिटेन सरकार के साथ निरंतर संभावनाएं तलाश रही है।

गैर सरकारी संगठन आल इंडिया ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस फ्रंट और हेरीटेज बेंगाल की याचिकाओं को पिछले साल न्यायालय ने एक साथ संलग्न कर दिया था। इन याचिकाओं में कहा गया था कि भारत को 1947 में आजादी मिली। परंतु केन्द्र में लगातार सरकारों ने ब्रिटेन से कोहिनूर हीरा भारत लाने के लिये बहुत कम प्रयास किये हैं।
इससे पहले केन्द्र ने न्यायालय में कहा था कि ब्रिटिश शासकों ने कोहिनूर हीरा न तो जबरन ले गए और न ही इसे चुराया था परंतु इसे पंजाब के शासकों ने ईस्ट इंडिया कंपनी को दिया था। शीर्ष अदालत ने केन्द्र से जानना चाहा था कि क्या वह दूनिया के सबसे बेशकीमती कोहिनूर हीरे पर अपना दावा करने की इच्छुक है। केन्द्र ने उस समय कहा था कि कोहिनूर को वापस लाने की मांग बार बार संसद में होती रही है।

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